अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुआ युद्धविराम समझौता अब गंभीर संकट में पड़ता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ओवल ऑफिस में हुई एक अहम खुफिया ब्रीफिंग के बाद ईरान को लेकर अपना रुख अचानक बदल दिया। कुछ समय पहले तक इस युद्धविराम को बड़ी कूटनीतिक सफलता बताया जा रहा था, लेकिन अब अमेरिका ने ईरान पर समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप तुर्किये में होने वाले NATO सम्मेलन के लिए रवाना होने से पहले व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आपात बैठक में शामिल हुए। इस बैठक में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने ट्रंप को नई खुफिया जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया है। अमेरिका का दावा है कि इन हमलों में एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।
अमेरिकी पक्ष के अनुसार, कुछ ही घंटों के भीतर तीन व्यापारिक जहाजों पर हमला किया गया, जिनमें एक LNG टैंकर भी शामिल था। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से तेल और गैस की बड़ी मात्रा में आवाजाही होती है। ऐसे में इस इलाके में किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बड़ा खतरा मानी जाती है।
खुफिया जानकारी मिलने के बाद ट्रंप ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारियों से लंबी चर्चा की। बताया जा रहा है कि वह इस बात से नाराज थे कि ईरान युद्धविराम समझौते का पालन नहीं कर रहा है। इसके बाद अमेरिकी प्रशासन ने ईरान को दी गई कई रियायतें वापस लेने का फैसला किया। अमेरिका ने ईरान को तेल बेचने से जुड़ी अनुमति भी रद्द कर दी और होर्मुज के आसपास ईरानी सैन्य ठिकानों पर हवाई हमलों को मंजूरी दी।
अमेरिकी कार्रवाई के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों, मिसाइल साइट्स और ड्रोन सुविधाओं को निशाना बनाया है। व्हाइट हाउस ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने हमले जारी रखे, तो अमेरिका और कड़े कदम उठा सकता है। हालांकि ट्रंप ने यह भी कहा है कि वह नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की स्थिति नहीं चाहते।
दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका के आरोपों से इनकार किया है। तेहरान का कहना है कि अमेरिका ने खुद समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया और वैकल्पिक समुद्री मार्गों को लेकर बिना सहमति के कदम उठाए। ईरान ने आरोप लगाया कि वॉशिंगटन तनाव कम करने के बजाय क्षेत्र में सैन्य दबाव बढ़ा रहा है।
NATO सम्मेलन में ट्रंप ने साफ संकेत दिया कि अब उन्हें ईरान के साथ हुए शांति समझौते के बचने की उम्मीद कम दिख रही है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने हितों और समुद्री सुरक्षा की रक्षा के लिए जरूरी कार्रवाई करेगा।
फिलहाल होर्मुज विवाद ने अमेरिका-ईरान संबंधों को फिर से टकराव की स्थिति में ला दिया है। अगर तनाव कम नहीं हुआ, तो इसका असर सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक तेल कीमतों और समुद्री व्यापार पर भी पड़ सकता है।

