15 May 2026, Fri

‘ऑपरेशन सिंदूर’ की बरसी पर पूर्व DGMO का बड़ा बयान, कहा- ‘पाकिस्तान ने लगाई थी कार्रवाई रोकने की गुहार’

ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर भारतीय सेना के पूर्व DGMO लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने इस सैन्य अभियान को भारत की रणनीतिक और सैन्य क्षमता में एक ऐतिहासिक मोड़ बताया है। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन सिर्फ एक जवाबी कार्रवाई नहीं था, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की बदलती रणनीति और आत्मनिर्भर रक्षा प्रणाली का मजबूत उदाहरण था।

जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी अहम जानकारियां साझा कीं। उन्होंने बताया कि इस अभियान के दौरान पाकिस्तान के कई महत्वपूर्ण सैन्य और आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। उनके अनुसार कुल 11 एयरफील्ड और 9 बड़े आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए गए, जिससे दुश्मन को भारी नुकसान हुआ।

उन्होंने यह भी दावा किया कि इस पूरे ऑपरेशन के दौरान भारत को अपने किसी भी सैन्य संसाधन का नुकसान नहीं उठाना पड़ा। यह भारतीय सेना की बेहतर योजना, तकनीकी क्षमता और समन्वय का परिणाम था। लेफ्टिनेंट जनरल घई के अनुसार, ऑपरेशन के दौरान खुफिया एजेंसियों, साइबर यूनिट, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर टीम और सुरक्षा बलों के बीच बेहतरीन तालमेल देखने को मिला।

पूर्व DGMO ने कहा कि इस ऑपरेशन में 9 स्टैंडऑफ प्रिसिजन स्ट्राइक की गईं, जिनमें भारतीय सेना और वायुसेना दोनों की भूमिका बेहद अहम रही। इनमें आधुनिक स्वदेशी हथियार प्रणालियों का उपयोग किया गया, जिसमें ब्रह्मोस मिसाइल, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और साइबर क्षमताएं प्रमुख रहीं।

उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित कर दिया है कि भारत अब सिर्फ आयातित रक्षा तकनीक पर निर्भर नहीं है, बल्कि अपनी स्वदेशी क्षमताओं के दम पर किसी भी चुनौती का जवाब देने में सक्षम है। यह आत्मनिर्भर भारत की रक्षा नीति की एक बड़ी सफलता है।

लेफ्टिनेंट जनरल घई के मुताबिक, ऑपरेशन के दौरान स्थिति इतनी प्रभावी रही कि पाकिस्तान को कार्रवाई रोकने के लिए मजबूर होना पड़ा और उसने भारत से सैन्य गतिविधियां रोकने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह भारत की रणनीतिक बढ़त और सटीक सैन्य योजना का परिणाम था।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर का उद्देश्य केवल जवाब देना नहीं था, बल्कि आतंकवाद के नेटवर्क को पूरी तरह कमजोर करना और भविष्य में किसी भी हमले को रोकना था। यह अभियान पूरी तरह नियंत्रित, सटीक और जिम्मेदारी के साथ चलाया गया।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के अभियान यह दर्शाते हैं कि आधुनिक युद्ध अब केवल पारंपरिक लड़ाई तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसमें तकनीक, खुफिया जानकारी और साइबर क्षमताओं की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।

ऑपरेशन सिंदूर को भारतीय सैन्य इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है, जिसने न केवल देश की सुरक्षा रणनीति को मजबूत किया, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी भारत की सैन्य क्षमता का संदेश दिया।

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