दिल्ली अपने ऐतिहासिक इलाकों और उनके अनोखे नामों के लिए जानी जाती है। राजधानी में कई ऐसी जगहें हैं, जिनके नाम अपने भीतर सदियों पुराना इतिहास समेटे हुए हैं। इन्हीं में से एक है पहाड़गंज। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के पश्चिम में स्थित यह इलाका आज होटल, बाजार, रेस्टोरेंट और पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है। लेकिन यहां पहुंचने वाले कई लोगों के मन में एक सवाल जरूर आता है कि जब इलाके में आज कोई पहाड़ दिखाई नहीं देता, तो इसका नाम पहाड़गंज आखिर पड़ा कैसे?
इस नाम के पीछे दिल्ली के पुराने भूगोल और इतिहास का संबंध बताया जाता है। समय के साथ शहर का स्वरूप काफी बदल गया और जिन जगहों पर कभी प्राकृतिक ऊंचाई या रिज हुआ करती थी, वहां आज घनी आबादी और इमारतें नजर आती हैं।
‘पहाड़’ और ‘गंज’ से बना पहाड़गंज
पहाड़गंज नाम दो शब्दों से मिलकर बना है। इसमें ‘पहाड़’ का अर्थ पहाड़ी या ऊंचाई से है, जबकि ‘गंज’ का इस्तेमाल बाजार या व्यापारिक इलाके के लिए किया जाता था। इस तरह पहाड़गंज का सामान्य अर्थ पहाड़ी इलाके में बसा बाजार माना जा सकता है।
मुगल काल में यह इलाका शाहजहानाबाद यानी पुरानी दिल्ली की दीवारों के बाहर अजमेरी गेट के आसपास स्थित एक महत्वपूर्ण उपनगरीय क्षेत्र था। उस दौर में यहां बड़ा बाजार हुआ करता था और यह अनाज के प्रमुख थोक बाजारों में शामिल था। शाही सीमा शुल्क से जुड़ी व्यवस्था भी इसी क्षेत्र में मौजूद थी।
कभी ‘शाहगंज’ के नाम से भी जाना जाता था
इतिहास के अलग-अलग संदर्भों में पहाड़गंज को ‘शाहगंज’ और ‘किंग्स गंज’ यानी राजा का बाजार भी कहा गया है। हालांकि, वर्तमान में प्रचलित पहाड़गंज नाम को यहां की पुरानी भौगोलिक स्थिति से जोड़कर देखा जाता है।
बताया जाता है कि यह क्षेत्र रायसीना हिल के आसपास की ऊंची जमीन और रिज क्षेत्र के करीब था। आज इसी क्षेत्र में राष्ट्रपति भवन स्थित है। कुछ ऐतिहासिक व्याख्याओं के अनुसार, आसपास कभी छोटी-बड़ी पहाड़ियां या चट्टानी ऊंचाइयां मौजूद थीं। समय के साथ शहरी विस्तार, निर्माण और जमीन के समतलीकरण के कारण इन प्राकृतिक ऊंचाइयों का स्वरूप बदल गया।
करोल बाग की दिशा में एक पहाड़ी पर मौजूद पुरानी ईदगाह को भी इस क्षेत्र की भौगोलिक बनावट से जोड़कर देखा जाता है।
आज पर्यटकों के बीच मशहूर है पहाड़गंज
वर्तमान समय में पहाड़गंज दिल्ली के प्रमुख व्यस्त इलाकों में शामिल है। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के नजदीक होने के कारण यहां देश-विदेश से आने वाले लोगों की आवाजाही रहती है। इलाके में सस्ते होटल, रेस्टोरेंट, कपड़े, बैग और कई तरह के सामान आसानी से मिल जाते हैं।
पहाड़गंज की खासियत सिर्फ इसका बाजार नहीं, बल्कि इसका इतिहास भी है। मुगल दौर के व्यापारिक इलाके से लेकर आधुनिक पर्यटन केंद्र तक इस क्षेत्र ने लंबे समय में कई बदलाव देखे हैं।
आज यहां भले ही कोई पहाड़ नजर नहीं आता, लेकिन ‘पहाड़गंज’ नाम पुराने दिल्ली के उस भूगोल की याद दिलाता है, जब इस इलाके के आसपास प्राकृतिक ऊंचाइयां और रिज मौजूद होने की बात कही जाती है। यही वजह है कि इस नाम को दिल्ली के बदलते इतिहास और भूगोल की एक दिलचस्प निशानी माना जाता है।

