इजरायल-ईरान तनाव पर नेतन्याहू का बड़ा बयान: “ईरान इजरायल पर होलोकॉस्ट जैसा हमला करना चाहता था”
इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के खिलाफ कड़ा बयान दिया है। नेतन्याहू ने आरोप लगाया कि ईरान का नेतृत्व परमाणु हथियारों और हजारों बैलिस्टिक मिसाइलों के जरिए इजरायल को पूरी तरह तबाह करने की साजिश रच रहा था। उन्होंने इस कथित योजना को “एक और होलोकॉस्ट” करार दिया।
यह बयान उन्होंने माउंट हर्जल में आयोजित एक राजकीय मेमोरियल डे समारोह के दौरान दिया, जहां उन्होंने देश की सुरक्षा और यहूदी समुदाय के अस्तित्व से जुड़े मुद्दों पर बात की।
ईरान पर गंभीर आरोप
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा कि ईरान की रणनीति इजरायल के खिलाफ एक बड़े पैमाने पर विनाशकारी हमला करने की थी। उनके अनुसार, ईरान न केवल परमाणु हथियार विकसित कर रहा था, बल्कि हजारों लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों का भी नेटवर्क तैयार कर रहा था, जिससे इजरायल के अस्तित्व को गंभीर खतरा पैदा हो सकता था।
उन्होंने कहा कि इजरायल ने अपने सहयोगी देशों, विशेषकर संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ मिलकर इस खतरे को समय रहते बेअसर करने के लिए कार्रवाई की है। नेतन्याहू के मुताबिक, यह कदम “तात्कालिक और अस्तित्वगत खतरे” को रोकने के लिए जरूरी था।
“अस्तित्व की रक्षा के लिए कार्रवाई”
नेतन्याहू ने अपने संबोधन में कहा कि इजरायल का सैन्य अभियान केवल जवाबी कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह देश के अस्तित्व की रक्षा के लिए उठाया गया आवश्यक कदम है। उन्होंने कहा, “हमने उस विनाशकारी तंत्र को पहले ही खत्म कर दिया है जो हमारे अस्तित्व के लिए खतरा बन रहा था।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि इजरायल हर पीढ़ी में ऐसे खतरों का सामना करता आया है और इस बार भी देश ने अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निर्णायक कदम उठाया है।
यहूदी समुदाय की सुरक्षा पर जोर
अपने भाषण में नेतन्याहू ने यहूदी समुदाय की सुरक्षा और उसकी निरंतरता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि इजरायल की नीति हमेशा यह सुनिश्चित करने पर केंद्रित रही है कि यहूदी लोगों की “जीवन रेखा कभी न टूटे।”
उन्होंने मेमोरियल डे समारोह में एक द्रूज अधिकारी का भी उल्लेख किया, जो हाल ही में दक्षिणी लेबनान में शहीद हुए थे। नेतन्याहू ने यह भी कहा कि इजरायली सेना में यहूदी और द्रूज समुदाय कंधे से कंधा मिलाकर लड़ रहे हैं।
द्रूज समुदाय कौन हैं?
द्रूज एक छोटा धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय है जो मुख्य रूप से सीरिया, लेबनान, इजरायल और जॉर्डन में निवास करता है। इनकी कुल आबादी लगभग 10 लाख के आसपास मानी जाती है। यह समुदाय 11वीं सदी में शिया इस्लाम से विकसित हुआ था, लेकिन यह खुद को न तो पूरी तरह मुस्लिम, न ईसाई और न ही यहूदी मानता है।
द्रूज समुदाय एकेश्वरवाद में विश्वास करता है और पुनर्जन्म तथा आत्मा की अवधारणा को भी मान्यता देता है। इजरायल में यह समुदाय सेना और प्रशासन में भी सक्रिय भूमिका निभाता है।
क्षेत्रीय तनाव पर असर
नेतन्याहू के इस बयान के बाद इजरायल और ईरान के बीच तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। दोनों देशों के बीच पहले से ही परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर गहरा विवाद बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान क्षेत्रीय कूटनीति को और जटिल बना सकते हैं।
फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्थिति पर नजर बनाए हुए है, क्योंकि मध्य-पूर्व में किसी भी बड़े टकराव का असर वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा बाजारों पर पड़ सकता है।

