मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमान (CENTCOM) ने दावा किया है कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हालांकि CENTCOM का कहना है कि सभी मिसाइलों को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट कर लिया गया और अमेरिकी ठिकानों को कोई नुकसान नहीं हुआ।
इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं और आशंका जताई जा रही है कि दोनों देशों के बीच तनाव फिर से सैन्य टकराव की दिशा में बढ़ सकता है।
CENTCOM ने क्या कहा?
अमेरिकी सेंट्रल कमान ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि शाम लगभग 5:45 बजे (ईस्टर्न टाइम) ईरान से कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। बयान के अनुसार, यह हमला मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी बलों को निशाना बनाने की कोशिश थी।
CENTCOM ने कहा कि अमेरिकी और सहयोगी रक्षा प्रणालियों ने सभी मिसाइलों को सफलतापूर्वक रोक दिया। कमान ने यह भी कहा कि अमेरिकी सेना पूरी तरह सतर्क है और किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए तैयार है।
फिर बढ़ा टकराव का खतरा
पिछले कुछ दिनों से अमेरिका और ईरान के बीच अपेक्षाकृत शांति का माहौल देखा जा रहा था। इससे पहले कई हफ्तों तक दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई और जवाबी हमलों का दौर चला था। हाल के दिनों में हमलों की रफ्तार कम होने के बाद यह माना जा रहा था कि दोनों पक्ष कूटनीतिक बातचीत की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
लेकिन CENTCOM के ताजा दावे के बाद एक बार फिर क्षेत्रीय संघर्ष बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है। यदि इस घटना के बाद अमेरिका जवाबी कार्रवाई करता है, तो मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना हुआ है तनाव का केंद्र
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव का एक बड़ा कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) भी है। यह समुद्री मार्ग दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है।
तनाव बढ़ने के दौरान इस जलडमरूमध्य से ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज होती हैं, तो तेल की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
फिलहाल ईरान की ओर से इस कथित मिसाइल हमले को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए CENTCOM के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां और क्षेत्रीय स्रोत भी इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले 24 से 48 घंटे इस मामले में बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं। यदि दोनों देशों की ओर से संयम बरता गया तो तनाव को कूटनीतिक स्तर पर नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन किसी भी सैन्य जवाबी कार्रवाई से स्थिति और गंभीर हो सकती है।
फिलहाल मध्य पूर्व में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर सतर्कता बढ़ा दी गई है। पूरी दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि अमेरिका और ईरान इस ताजा घटनाक्रम पर आगे क्या कदम उठाते हैं।

