15 Jun 2026, Mon

‘ईरान-अमेरिका के बीच शांति समझौता हुआ, शुक्रवार से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज खुलेगा’, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का दावा

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव को समाप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण शांति समझौता हो गया है। ट्रंप के अनुसार, दोनों देश 19 जून को इस समझौते पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर करेंगे। यदि यह समझौता लागू होता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार और पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति पर इसका बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस समझौते की घोषणा करते हुए कहा कि ईरान के साथ वार्ता सफल रही है और दोनों पक्ष कई प्रमुख मुद्दों पर सहमति तक पहुंच चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि समझौते के बाद रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से सभी देशों के जहाजों के लिए खोल दिया जाएगा और इस मार्ग पर किसी प्रकार का टोल टैक्स नहीं लिया जाएगा।

गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच पिछले 100 दिनों से अधिक समय से तनाव और संघर्ष की स्थिति बनी हुई थी। इस दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावित होने से वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया था। दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में इसके दोबारा खुलने की संभावना ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सकारात्मक संकेत दिए हैं।

ट्रंप ने कहा कि समझौते के तहत परमाणु कार्यक्रम, तेल निर्यात प्रतिबंध, फ्रीज की गई संपत्तियों और समुद्री मार्गों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनी है। हालांकि, ईरान की ओर से अब तक इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इससे पहले भी ट्रंप प्रशासन द्वारा ऐसे दावे किए गए थे, जिन्हें ईरान ने खारिज कर दिया था।

जानकारों का मानना है कि यदि यह समझौता वास्तव में लागू होता है तो इसका सबसे बड़ा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दिखाई देगा। तेल आपूर्ति सामान्य होने से कच्चे तेल की कीमतों में कमी आ सकती है। भारत, चीन, जापान और यूरोप के कई देशों को इससे राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि ये देश बड़े पैमाने पर तेल आयात पर निर्भर हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, समझौते पर हस्ताक्षर स्विट्जरलैंड में हो सकते हैं। ट्रंप ने इसे अपनी विदेश नीति की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि कई अमेरिकी राष्ट्रपति ईरान के साथ स्थायी शांति स्थापित करने की कोशिश करते रहे, लेकिन सफलता नहीं मिली। उन्होंने दावा किया कि यह समझौता पूरे क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता लाने में मदद करेगा।

हालांकि, समझौते की घोषणा के बीच पश्चिम एशिया में तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। क्षेत्र में विभिन्न घटनाक्रम और सुरक्षा चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब 19 जून पर टिकी हैं, जब इस प्रस्तावित समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर होने की संभावना जताई जा रही है।

यदि यह पहल सफल रहती है तो अमेरिका-ईरान संबंधों में नया अध्याय शुरू हो सकता है और वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी इसका लाभ मिल सकता है। फिलहाल दुनिया इस संभावित समझौते और इसके प्रभावों पर नजर बनाए हुए है।

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