22 Jul 2026, Wed

इथेनॉल मिशन में सरकारी कंपनियों ने खर्च किए ₹1.72 लाख करोड़, सरकार ने संसद में दी जानकारी

नई दिल्ली: भारत में पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण (Ethanol Blended Petrol) को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार और सरकारी तेल कंपनियां लगातार बड़े स्तर पर निवेश कर रही हैं। संसद में सोमवार को सरकार ने जानकारी दी कि सार्वजनिक क्षेत्र की ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) अब तक इथेनॉल मिशन पर कुल ₹1.72 लाख करोड़ से अधिक खर्च कर चुकी हैं। सरकार का मानना है कि इस पहल से देश की कच्चे तेल पर निर्भरता कम होगी, किसानों की आय बढ़ेगी और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने संसद में बताया कि इथेनॉल सप्लाई ईयर (ESY) 2023-24 के दौरान सरकारी तेल कंपनियों ने इथेनॉल खरीद पर ₹48,757 करोड़ खर्च किए। इसके बाद ESY 2024-25 में यह राशि बढ़कर ₹73,996 करोड़ हो गई। वहीं ESY 2025-26 में जून 2026 तक ही कंपनियां ₹49,577 करोड़ का निवेश कर चुकी हैं। इस प्रकार तीन वर्षों में कुल खर्च लगभग ₹1.72 लाख करोड़ तक पहुंच गया है।

सरकार के अनुसार, 16 जुलाई 2026 तक इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियों ने 501 इथेनॉल निर्माण इकाइयों को पंजीकृत किया है। ये सभी इकाइयां इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल कार्यक्रम के तहत डीनेचर्ड एनहाइड्रस इथेनॉल की आपूर्ति कर रही हैं। सरकार का कहना है कि देशभर में फैला यह सप्लायर नेटवर्क इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की उपलब्धता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

इथेनॉल उत्पादन के मामले में भी सरकारी कंपनियां लगातार अपनी क्षमता बढ़ा रही हैं। इंडियन ऑयल की प्रतिदिन उत्पादन क्षमता 228 किलोलीटर है और उसने ESY 2025-26 में 30 जून तक 712 किलोलीटर इथेनॉल का उत्पादन किया। भारत पेट्रोलियम की उत्पादन क्षमता 200 किलोलीटर प्रतिदिन है, जबकि इस अवधि में उसका उत्पादन 76 किलोलीटर रहा। वहीं हिंदुस्तान पेट्रोलियम बायोफ्यूल्स लिमिटेड (HPCL Biofuels) ने सबसे बेहतर प्रदर्शन करते हुए 120 किलोलीटर प्रतिदिन की क्षमता के साथ 9,373 किलोलीटर इथेनॉल का उत्पादन किया।

सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक ESY 2024-25 के दौरान उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 124.98 करोड़ लीटर इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल की बिक्री दर्ज की गई। इसके बाद महाराष्ट्र में 110.66 करोड़ लीटर, तमिलनाडु में 92.18 करोड़ लीटर, कर्नाटक में 79.24 करोड़ लीटर और गुजरात में 56.29 करोड़ लीटर की बिक्री हुई। इससे स्पष्ट है कि देश के बड़े राज्यों में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की मांग लगातार बढ़ रही है।

संसद में E20 ईंधन को लेकर उठे सवालों का जवाब देते हुए मंत्री सुरेश गोपी ने कहा कि देश में इस समय 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और 3 करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें E20 ईंधन का उपयोग कर रही हैं। इनमें बड़ी संख्या उन वाहनों की भी है जो विशेष रूप से E20 के लिए प्रमाणित नहीं हैं। इसके बावजूद अब तक ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से बड़े पैमाने पर इंजनों को नुकसान पहुंच रहा हो।

उन्होंने यह भी बताया कि सरकारी तेल कंपनियां देशभर के पेट्रोल पंपों पर नियमित रूप से ईंधन की गुणवत्ता की जांच कर रही हैं ताकि उपभोक्ताओं को मानक गुणवत्ता वाला ईंधन उपलब्ध कराया जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, पेट्रोल आयात पर खर्च कम करने और गन्ना व अन्य कृषि उत्पादों से जुड़े किसानों को अतिरिक्त आय उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले वर्षों में सरकार का लक्ष्य इथेनॉल मिश्रण को और अधिक बढ़ाकर स्वच्छ, किफायती और आत्मनिर्भर ऊर्जा व्यवस्था को मजबूत करना है।

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