18 Jul 2026, Sat

अमेरिकी मशीन टूटी, हर मिनट बहता था 25 हजार लीटर पानी, फिर कैसे बनी 12 किमी लंबी स्लीमनाबाद टनल? CM मोहन यादव ने देखा इंजीनियरिंग का चमत्कार

भोपाल: मध्य प्रदेश के कटनी जिले में बन रही देश की सबसे महत्वाकांक्षी सिंचाई परियोजनाओं में शामिल स्लीमनाबाद टनल अब लगभग तैयार हो चुकी है। करीब 12 किलोमीटर लंबी इस सुरंग को इंजीनियरिंग का अनूठा उदाहरण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को परियोजना का निरीक्षण किया और इसे प्रदेश के विकास तथा किसानों की समृद्धि की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। उनके अनुसार, यह परियोजना केवल एक टनल नहीं, बल्कि विंध्य और महाकौशल क्षेत्र की कृषि व्यवस्था में बड़ा परिवर्तन लाने वाली योजना है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि स्लीमनाबाद टनल के पूरा होने के बाद जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना सहित आसपास के लगभग 1,450 गांवों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। इस परियोजना से करीब 2.45 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। लंबे समय से पानी की कमी से जूझ रहे इस क्षेत्र के किसानों के लिए यह परियोजना किसी वरदान से कम नहीं मानी जा रही है।

कठिन चुनौतियों के बीच तैयार हुई सुरंग

स्लीमनाबाद टनल का निर्माण तकनीकी दृष्टि से बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। विशेषज्ञों के अनुसार, विंध्य पर्वतमाला की लगभग 40 मीटर ऊंची रिज लाइन को भेदकर सुरंग बनाना आसान नहीं था। कई इंजीनियरों ने इसे बेहद कठिन परियोजना माना, लेकिन आधुनिक तकनीक और वर्षों की मेहनत के बाद यह सपना अब साकार होने के करीब पहुंच गया है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि परियोजना पर तीन शिफ्टों में लगातार काम किया गया। शुरुआती वर्षों में निर्माण कार्य धीमी गति से आगे बढ़ा और वर्ष 2015 तक केवल 1,406 मीटर खुदाई ही पूरी हो सकी थी। इसके बाद 2016 में जर्मनी से मंगाई गई अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीन की मदद से कार्य को गति मिली। हालांकि, निर्माण के दौरान भूगर्भीय परिस्थितियों, सुरक्षा मानकों और तकनीकी चुनौतियों ने कई बार काम को प्रभावित किया।

ठेकेदार ने छोड़ा साथ, फिर भी नहीं रुका काम

मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2023 में नई सरकार बनने के दौरान परियोजना को बड़ा झटका लगा था। ठेकेदार ने कई तकनीकी और वित्तीय कारणों का हवाला देते हुए काम जारी रखने में असमर्थता जताई। उस समय मशीनें भी पुरानी हो चुकी थीं और केवल एक मशीन के सहारे खुदाई का कार्य जारी रखा गया। इसके बावजूद इंजीनियरों, तकनीशियनों और मजदूरों ने हार नहीं मानी और लगातार प्रयासों के बाद आज यह परियोजना अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।

उन्होंने कहा कि यह सफलता वर्षों के संघर्ष, आधुनिक तकनीक और टीमवर्क का परिणाम है। सरकार ने परियोजना को प्राथमिकता देते हुए हर संभव सहयोग उपलब्ध कराया, जिससे निर्माण कार्य दोबारा गति पकड़ सका।

नर्मदा का पानी बदलेगा विंध्य की तस्वीर

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि विंध्य क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध होने के बावजूद जल संकट से जूझता रहा है। स्लीमनाबाद टनल के माध्यम से नर्मदा नदी का पानी उन इलाकों तक पहुंचेगा जहां सिंचाई की सबसे अधिक जरूरत है। उन्होंने इसे विज्ञान और इंजीनियरिंग का चमत्कार बताते हुए कहा कि यह परियोजना गंगा बेसिन के अंतर्गत आने वाले सोन नदी क्षेत्र तक हरियाली पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

उनके अनुसार, इस परियोजना से किसानों की आय बढ़ेगी, फसल उत्पादन में सुधार होगा और क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। साथ ही स्थानीय व्यापार और रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होने की उम्मीद है।

इंजीनियरिंग की मिसाल बनेगी परियोजना

विशेषज्ञों का मानना है कि लगभग 12 किलोमीटर लंबी यह सुरंग भविष्य में इंजीनियरिंग संस्थानों के लिए अध्ययन का विषय बनेगी। परियोजना को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह भीषण भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं का भी सामना कर सके। कई स्थानों पर सुरंग की गहराई जमीन से लगभग 120 फीट नीचे तक है, फिर भी इसकी संरचना को अगले 100 वर्षों तक सुरक्षित रखने के मानकों के अनुसार तैयार किया गया है।

स्लीमनाबाद टनल के पूरा होने के साथ मध्य प्रदेश को देश की सबसे महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं में से एक का लाभ मिलेगा। यह परियोजना न केवल लाखों किसानों के जीवन में बदलाव लाएगी, बल्कि आधुनिक भारतीय इंजीनियरिंग क्षमता का भी एक नया उदाहरण स्थापित करेगी।

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