नई दिल्ली। अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। दोनों देशों के बीच आखिरी समय तक व्यापार समझौते को लेकर बातचीत चलती रही, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद अमेरिका करीब 20 अरब डॉलर के कनाडाई सामान पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने की तैयारी में है। इस फैसले से दोनों देशों के बीच पहले से जारी व्यापारिक तनाव और गहरा सकता है।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कहा कि कनाडा इस सप्ताह की शुरुआत में तय की गई शर्तों के आधार पर व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए तैयार नहीं हुआ। अमेरिका का कहना है कि उसने कनाडा को प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में सबसे बेहतर शर्तों की पेशकश की थी। हालांकि, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिकी प्रस्ताव में आखिरी समय पर किए गए बदलावों को अनुचित बताया है।
कार्नी के मुताबिक, प्रस्ताव में किए गए बदलाव कनाडा की अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आखिरी समय पर शर्तों में बदलाव किए जाने से किसी भी संभावित व्यापार समझौते की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं।
20 अरब डॉलर के सामान पर असर
अमेरिका की ओर से प्रस्तावित 50 फीसदी टैरिफ कनाडा से आयात होने वाले करीब 20 अरब डॉलर के उत्पादों को प्रभावित कर सकता है। इसमें रोजमर्रा और औद्योगिक इस्तेमाल से जुड़े कई तरह के सामान शामिल हैं। इनमें हॉकी स्टिक से लेकर मेडिकल इस्तेमाल में आने वाले टंग डिप्रेसर तक के उत्पाद शामिल बताए जा रहे हैं।
हालांकि, प्रस्तावित टैरिफ कनाडा के अमेरिका को होने वाले कुल निर्यात का करीब 5 फीसदी हिस्सा ही प्रभावित करेगा, लेकिन इसका असर सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच पहले से चल रही राजनीतिक और आर्थिक खींचतान के बीच यह फैसला रिश्तों पर भी असर डाल सकता है।
अमेरिका-कनाडा के बीच कितना बड़ा व्यापार?
अमेरिका और कनाडा दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदारों में शामिल हैं। पिछले साल दोनों देशों के बीच सामान और सेवाओं का कुल कारोबार करीब 880 अरब डॉलर रहा था। दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे से काफी हद तक जुड़ी हुई हैं। ऐसे में व्यापार शुल्क में बड़ा बदलाव कंपनियों, निर्यातकों और उपभोक्ताओं के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है।
तीन दिन बढ़ाई गई थी टैरिफ की समयसीमा
अमेरिका ने पहले कनाडाई सामान पर नए टैरिफ को बुधवार रात 12:01 बजे से लागू करने की योजना बनाई थी। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों देशों को बातचीत के लिए अतिरिक्त समय देने के मकसद से समयसीमा को तीन दिन बढ़ा दिया था।
इसके बावजूद आखिरी दौर की बातचीत में कोई समझौता नहीं हो सका। अब कनाडाई निर्यातकों के सामने 50 फीसदी टैरिफ का खतरा खड़ा है। यदि दोनों देश जल्द किसी समझौते पर नहीं पहुंचते हैं, तो इसका असर कई कंपनियों और कारोबारियों पर पड़ सकता है।
फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या अमेरिका और कनाडा फिर से बातचीत की मेज पर लौटकर कोई समाधान निकालते हैं या दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव और बढ़ता है। लंबे समय तक जारी रहने वाली टैरिफ जंग से उत्तरी अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

