मुंबई के प्रसिद्ध श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर में कथित दान अनियमितता के मामले में बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मंदिर में पिछले पांच वर्षों के दौरान प्राप्त नकद दान, सोना-चांदी के आभूषणों और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं का विशेष ऑडिट (लेखापरीक्षण) कराने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले को मंदिर के वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, विशेष ऑडिट के दौरान मंदिर में प्राप्त नकद दान, सोना-चांदी के आभूषण, कीमती धातुएं, अन्य मूल्यवान वस्तुएं, उनकी प्रविष्टियां, वित्तीय लेन-देन, रिकॉर्ड प्रबंधन और रखरखाव व्यवस्था की विस्तृत जांच की जाएगी। ऑडिट का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मंदिर में प्राप्त दान और संपत्तियों का सही तरीके से लेखा-जोखा रखा गया है और उनका प्रबंधन निर्धारित नियमों के अनुरूप हुआ है।
जानकारी के मुताबिक, ऑडिट रिपोर्ट आने के बाद महाराष्ट्र सरकार आगे की कार्रवाई पर फैसला करेगी। यदि जांच में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता, रिकॉर्ड में गड़बड़ी, प्रबंधन में लापरवाही या नियमों के उल्लंघन के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित अधिकारियों या जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
इस फैसले से पहले सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सदा सरवणकर ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात की थी। बताया जा रहा है कि इस बैठक के बाद मंदिर के दान और वित्तीय रिकॉर्ड का विशेष ऑडिट कराने का निर्णय लिया गया। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक इस मामले में किसी विशिष्ट अनियमितता का आधिकारिक विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
सिद्धिविनायक गणपति मंदिर देश के सबसे प्रतिष्ठित और सर्वाधिक दान प्राप्त करने वाले मंदिरों में शामिल है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं और मंदिर को बड़ी मात्रा में नकद दान, सोना, चांदी और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं अर्पित करते हैं। इसी कारण मंदिर के वित्तीय प्रबंधन और दान व्यवस्था को लेकर पारदर्शिता बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
विशेष ऑडिट के तहत पिछले पांच वर्षों के रिकॉर्ड की जांच किए जाने से यह स्पष्ट हो सकेगा कि मंदिर में प्राप्त दान का लेखा-जोखा किस प्रकार रखा गया, आभूषणों और बहुमूल्य वस्तुओं का भंडारण और सुरक्षा किस व्यवस्था के तहत की गई, तथा वित्तीय लेन-देन निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुरूप हुआ या नहीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि देश के बड़े धार्मिक संस्थानों में समय-समय पर स्वतंत्र ऑडिट और वित्तीय समीक्षा से संस्थागत पारदर्शिता मजबूत होती है। इससे श्रद्धालुओं का विश्वास भी बढ़ता है और दान प्रबंधन से जुड़े विवादों की संभावना कम होती है।
महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि ऑडिट का उद्देश्य किसी निष्कर्ष पर पहले से पहुंचना नहीं, बल्कि तथ्यों के आधार पर रिकॉर्ड की जांच करना है। यदि सभी दस्तावेज और वित्तीय प्रविष्टियां सही पाई जाती हैं, तो इससे मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली को भी मजबूती मिलेगी।
फिलहाल विशेष ऑडिट की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की जा रही है। श्रद्धालुओं और मंदिर से जुड़े लोगों की नजर अब इस ऑडिट रिपोर्ट पर टिकी है, क्योंकि इसके आधार पर आगे की प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।

