10 Jul 2026, Fri

सुप्रीम लीडर खामेनेई की हत्या का बदला लेकर रहेंगे, IRGC ने खाई कसम, खाड़ी में फिर छिड़ेगा भीषण युद्ध?

 

ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को उनके गृह नगर मशहद में सुपुर्द-ए-ख़ाक कर दिया गया है। खामेनेई का जनाजा कई दिनों तक चले शोक समारोहों और विशाल अंतिम यात्रा के बाद इमाम रज़ा श्राइन पहुंचा, जहां बड़ी संख्या में लोग उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए जमा हुए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, खामेनेई की मौत फरवरी में हुए अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमलों में हुई थी, जिसके बाद से ईरान में शोक और गुस्से का माहौल बना हुआ था।

मशहद में हुए अंतिम संस्कार के दौरान ईरान के अलग-अलग हिस्सों से आए लोग सड़कों पर नजर आए। कई लोग काले कपड़ों में थे और हाथों में ईरान के झंडे तथा खामेनेई की तस्वीरें लिए हुए थे। अंतिम यात्रा के दौरान अमेरिका और इज़राइल के खिलाफ नारे भी लगाए गए। खामेनेई का शव पहले तेहरान, क़ोम और इराक के शिया धार्मिक शहरों नजफ और करबला से होते हुए मशहद लाया गया था।

खामेनेई की मौत के बाद ईरान की राजनीति एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गई है। उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर बताया जा रहा है, लेकिन वे अभी तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोजतबा भी उसी हमले में घायल हुए थे, जिसमें उनके पिता की मौत हुई थी। उनकी अनुपस्थिति ने ईरान के भीतर राजनीतिक अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है।

इसी बीच ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के वरिष्ठ कमांडर ब्रिगेडियर जनरल अहमद वाहिदी ने अमेरिका और इज़राइल के खिलाफ बदला लेने का संकल्प दोहराया है। सिपाह न्यूज एजेंसी के हवाले से सामने आए बयान में वाहिदी ने कहा कि खामेनेई की हत्या को भुलाया नहीं जाएगा और दोषियों को जवाब देना ईरान की पक्की मांग बनी रहेगी। उन्होंने इसे ईरान, इस्लामी क्रांति और तथाकथित प्रतिरोध मोर्चे के खिलाफ बड़ा अपराध बताया।

वाहिदी के बयान के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। पहले से ही अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच हालात तनावपूर्ण हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और खाड़ी क्षेत्र वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम माने जाते हैं। ऐसे में ईरान की ओर से बदले की चेतावनी अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चिंता बढ़ा सकती है।

खामेनेई करीब चार दशक तक ईरान की सत्ता के सबसे शक्तिशाली केंद्र बने रहे। उनके नेतृत्व में ईरान की विदेश नीति, परमाणु कार्यक्रम और पश्चिमी देशों के साथ संबंधों ने कई बार दुनिया का ध्यान खींचा। उनके समर्थक उन्हें अमेरिका और इज़राइल के सामने झुकने से इनकार करने वाला नेता मानते रहे, जबकि आलोचक उनके शासन को कठोर और दमनकारी बताते रहे हैं।

फिलहाल खामेनेई की दफन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन उनके बाद ईरान किस दिशा में आगे बढ़ेगा, इस पर पूरी दुनिया की नजर है। IRGC की बदले वाली भाषा और मोजतबा खामेनेई की सार्वजनिक अनुपस्थिति आने वाले दिनों में ईरान की आंतरिक राजनीति और खाड़ी के सुरक्षा समीकरणों को और जटिल बना सकती है।

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