13 May 2026, Wed

सिलाव खाजा, गया अनरसा, रत्नागिरी आम और हाजीपुर का केला, जानें PM मोदी ने वियतनाम के राष्ट्रपति को तोहफे में क्या-क्या दिया

वियतनाम के राष्ट्रपति To Lam की भारत यात्रा इस बार न सिर्फ कूटनीतिक दृष्टि से अहम रही, बल्कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिहाज से भी बेहद खास रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी भारत यात्रा और वतन वापसी के दौरान उन्हें कई विशिष्ट और पारंपरिक भारतीय उपहार भेंट किए, जिनमें भारत की विविधता, कला और विरासत की झलक साफ दिखाई दी।

राष्ट्रपति To Lam 5 से 7 अप्रैल तक भारत के तीन दिवसीय दौरे पर रहे। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। दौरे के अंत में पीएम मोदी ने उन्हें ऐसे उपहार दिए जो भारत की सांस्कृतिक गहराई और आधुनिक सोच दोनों को दर्शाते हैं।

“नमोह 108” कमल: भारतीय परंपरा और विज्ञान का संगम

पीएम मोदी की ओर से दिए गए खास उपहारों में सबसे चर्चा में रहा “नमोह 108” कमल। यह कमल की एक विशेष प्रजाति है जिसे लखनऊ स्थित राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान ने विकसित किया है।

यह फूल न सिर्फ अपनी सुंदरता के लिए जाना जाता है, बल्कि इसे आधुनिक जैव-प्रौद्योगिकी और भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत के बीच एक जीवंत सेतु माना जाता है। 108 संख्या का भी भारतीय संस्कृति में विशेष आध्यात्मिक महत्व है, जिससे यह उपहार और भी खास बन जाता है।

भगवान बुद्ध की पीतल प्रतिमा: शांति का संदेश

वियतनाम के राष्ट्रपति को भेंट की गई भगवान बुद्ध की पीतल की प्रतिमा उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के कुशल कारीगरों द्वारा तैयार की गई है। मुरादाबाद अपने पीतल शिल्प के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है।

इस प्रतिमा में भगवान बुद्ध ध्यान मुद्रा में बैठे हैं और उनके पीछे बोधि वृक्ष की पत्तियों जैसा गोलाकार आभामंडल बना हुआ है। यह उपहार भारत की आध्यात्मिक परंपरा और शांति के संदेश को दर्शाता है।

वाराणसी का रेशमी कपड़ा: कारीगरी की पहचान

पीएम मोदी ने वियतनामी राष्ट्रपति को वाराणसी से विशेष रूप से मंगवाया गया रेशमी कपड़ा भी भेंट किया। यह कपड़ा अपने पारंपरिक जैकार्ड बुनाई और फूलों-बेलों के डिज़ाइन के लिए जाना जाता है।

वाराणसी सदियों से भारतीय वस्त्र कला का केंद्र रहा है और यह उपहार भारतीय हस्तशिल्प की उत्कृष्टता को दर्शाता है।

बिहार के पारंपरिक व्यंजन: स्वाद और परंपरा का मेल

उपहार सूची में बिहार के पारंपरिक व्यंजन भी शामिल रहे। इनमें सिलाव खाजा, गया का अनरसा, मिथिला मखाना और हाजीपुर का मालभोग केला प्रमुख हैं।

ये व्यंजन न सिर्फ स्वाद के लिए प्रसिद्ध हैं, बल्कि बिहार की सांस्कृतिक और कृषि परंपरा का भी प्रतिनिधित्व करते हैं।

महाराष्ट्र का खास योगदान: आम और हेल्दी मिलेट बार

महाराष्ट्र से राष्ट्रपति To Lam के लिए रत्नागिरी के प्रसिद्ध अल्फांसो आम और हेल्दी मिलेट बार भेजे गए। अल्फांसो आम अपनी मिठास और सुनहरे रंग के लिए दुनिया भर में लोकप्रिय है।

वहीं मिलेट बार को आधुनिक स्वास्थ्य जागरूकता और पारंपरिक भारतीय अनाज आधारित आहार का अनोखा मिश्रण माना जाता है। यह भारत के सुपरफूड्स को वैश्विक मंच पर बढ़ावा देने का प्रतीक भी है।

भारत की “सॉफ्ट डिप्लोमेसी” का उदाहरण

विशेषज्ञों का मानना है कि पीएम मोदी द्वारा दिए गए ये उपहार केवल औपचारिक भेंट नहीं हैं, बल्कि भारत की “सॉफ्ट डिप्लोमेसी” का हिस्सा हैं। इन उपहारों के माध्यम से भारत अपनी संस्कृति, कला, आध्यात्मिकता और आधुनिक विज्ञान को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करता है।

वियतनाम के राष्ट्रपति को दिए गए ये तोहफे दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने के साथ-साथ भारत की समृद्ध विरासत को भी दुनिया के सामने रखते हैं।

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