हिंदू धर्म में सावन माह को भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र महीनों में से एक माना जाता है। इस दौरान शिव पूजा, व्रत, जलाभिषेक और धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व होता है। हालांकि सावन में आने वाली एकादशी तिथि भी अत्यंत शुभ मानी जाती है, क्योंकि यह भगवान विष्णु की उपासना के लिए समर्पित होती है। सावन कृष्ण पक्ष की एकादशी को कामिका एकादशी कहा जाता है और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत और विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
पंचांग के अनुसार, सावन कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 8 अगस्त 2026 को दोपहर 1 बजकर 59 मिनट पर होगा और इसका समापन 9 अगस्त 2026 को सुबह 11 बजकर 4 मिनट पर होगा। उदयातिथि के आधार पर कामिका एकादशी का व्रत 9 अगस्त 2026 (रविवार) को रखा जाएगा। व्रत का पारण 10 अगस्त 2026 को किया जाएगा। पारण का शुभ समय सुबह 6 बजकर 18 मिनट से सुबह 8 बजे तक रहेगा।
धार्मिक मान्यता है कि कामिका एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से पापों का नाश होता है, जीवन में सुख-समृद्धि आती है और आर्थिक समस्याओं से राहत मिलती है। इस दिन कुछ विशेष वस्तुएं भगवान विष्णु को अर्पित करना अत्यंत शुभ माना गया है।
पीले फूल और पीले वस्त्र
भगवान विष्णु को पीला रंग अत्यंत प्रिय माना जाता है। कामिका एकादशी के दिन उन्हें पीले फूल, विशेष रूप से गेंदे या अन्य पीले पुष्प अर्पित करें। साथ ही पीले रंग का वस्त्र चढ़ाने से धन संबंधी परेशानियां दूर होने और घर में समृद्धि आने की मान्यता है।
पीला चंदन
एकादशी के दिन भगवान विष्णु को पीले चंदन का तिलक लगाना शुभ माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इससे कुंडली में बृहस्पति ग्रह मजबूत होता है और व्यक्ति को मान-सम्मान, प्रतिष्ठा तथा ज्ञान की प्राप्ति होती है।
तुलसी के पत्ते
भगवान विष्णु की पूजा तुलसी के बिना अधूरी मानी जाती है। तुलसी माता को भगवान विष्णु की प्रियतम माना गया है। इसलिए कामिका एकादशी पर भगवान विष्णु को तुलसी दल अवश्य अर्पित करें। भोग में भी तुलसी पत्ता रखना शुभ माना जाता है।
पंचामृत का भोग
कामिका एकादशी पर भगवान विष्णु को पंचामृत का भोग लगाना अत्यंत फलदायी माना जाता है। पंचामृत दूध, दही, घी, शहद और चीनी से बनाया जाता है। इसमें तुलसी का एक पत्ता डालकर भगवान को अर्पित करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है।
मखाने की खीर और केला
धार्मिक परंपरा के अनुसार मखाने की खीर और केला भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय हैं। एकादशी के दिन इनका भोग लगाने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और मनोकामनाओं की पूर्ति होने की मान्यता है।
कामिका एकादशी के दिन व्रत रखने के साथ विष्णु सहस्रनाम, विष्णु चालीसा और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जप करना भी शुभ माना जाता है। श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई भगवान विष्णु की आराधना से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।

