30 Jul 2026, Thu

सलमान रुश्दी पर हमला मामले में हादी मतर दोषी करार, फॉलो करता था हिज्बुल्लाह की विचारधारा; जानें कैसे बन गया था इतना ‘कट्टर’

न्यूयॉर्क: प्रसिद्ध लेखक सलमान रुश्दी पर वर्ष 2022 में हुए जानलेवा चाकू हमले के मामले में अमेरिकी नागरिक हादी मतर को संघीय अदालत ने आतंकवाद से जुड़े गंभीर आरोपों में दोषी ठहराया है। अदालत के इस फैसले को अमेरिका में आतंकवाद और कट्टरपंथी हिंसा के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कानूनी कार्रवाई माना जा रहा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, हादी मतर का संबंध ईरान समर्थित संगठन हिज्बुल्लाह की विचारधारा से था और उसने सलमान रुश्दी की हत्या की योजना कई महीनों तक बनाई थी।

न्यूयॉर्क के बफेलो स्थित संघीय अदालत में सुनवाई के दौरान जजों के पैनल ने 28 वर्षीय हादी मतर को विदेशी आतंकवादी संगठन हिज्बुल्लाह को सहायता देने की कोशिश, अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने और आतंकवादियों को समर्थन प्रदान करने के आरोपों में दोषी पाया। हादी मतर न्यू जर्सी के फेयरव्यू का निवासी है और अमेरिका में ही उसका जन्म तथा पालन-पोषण हुआ था।

अमेरिकी अटॉर्नी माइकल डीजियाकोमो ने फैसले के बाद कहा कि अमेरिका में जन्म लेने के बावजूद हादी मतर ने उन कट्टरपंथी विचारों को अपनाया जो हिंसा और आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने कहा कि आरोपी ईरान के उन नेताओं की विचारधारा से प्रभावित था जो वर्षों से सलमान रुश्दी के खिलाफ हिंसक कार्रवाई की वकालत करते रहे हैं।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, हादी मतर ने सलमान रुश्दी की हत्या की साजिश कई महीनों तक रची। जांच में सामने आया कि उसने हमले की विस्तृत तैयारी की थी और वह उन लोगों को अपना आदर्श मानता था जिन्हें वह तथाकथित “शहीद” कहता था। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी का उद्देश्य केवल हमला करना नहीं, बल्कि रुश्दी की हत्या करना था।

गौरतलब है कि 12 अगस्त 2022 को न्यूयॉर्क राज्य में आयोजित एक साहित्यिक कार्यक्रम के दौरान हादी मतर मंच पर पहुंच गया था और उसने सलमान रुश्दी पर चाकू से कई वार किए थे। इस हमले में रुश्दी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां लंबे इलाज के बाद उनकी जान बचाई जा सकी। हालांकि, इस हमले का असर उनकी सेहत पर लंबे समय तक रहा।

जांच एजेंसियों के अनुसार, हादी मतर ने यह हमला सलमान रुश्दी की विवादित पुस्तक “द सैटेनिक वर्सेज” (The Satanic Verses) को लेकर जारी किए गए फतवे से प्रेरित होकर किया था। यह उपन्यास 1988 में प्रकाशित हुआ था और इसके बाद से ही रुश्दी को कई धमकियों का सामना करना पड़ा था। ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह रुहोल्लाह खोमैनी ने पुस्तक के प्रकाशन के बाद रुश्दी के खिलाफ फतवा जारी किया था।

राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के सहायक अटॉर्नी जनरल जॉन ए. आइजनबर्ग ने कहा कि हादी मतर लंबे समय तक हिज्बुल्लाह की हिंसक विचारधारा से प्रभावित रहा और उसने फतवे को अमल में लाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि यह मामला इस बात का उदाहरण है कि चरमपंथी विचारधाराएं किस तरह लोगों को हिंसक अपराधों की ओर धकेल सकती हैं।

अदालत के फैसले के बाद हादी मतर को सजा सुनाए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इस मामले को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमले और अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद से जुड़े एक महत्वपूर्ण केस के रूप में देखा जा रहा है।

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