मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में बुधवार, 1 जुलाई 2026 को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) छोड़कर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हुए वरिष्ठ नेता सचिन अहिर महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति निर्विरोध निर्वाचित हो गए। उन्होंने पार्टी बदलने के एक दिन बाद ही महायुति के उम्मीदवार के रूप में यह महत्वपूर्ण संवैधानिक पद हासिल किया है।
सचिन अहिर ने मंगलवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार की मौजूदगी में उपसभापति पद के लिए नामांकन दाखिल किया था। उनके अचानक पाला बदलने को उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ-साथ आदित्य ठाकरे के लिए भी बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। अहिर लंबे समय से आदित्य ठाकरे के करीबी नेताओं में शामिल थे और पार्टी के श्रमिक संगठन सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे थे।
विपक्ष ने वापस लिया अपना उम्मीदवार
महा विकास आघाड़ी ने शिवसेना यूबीटी के विधान परिषद सदस्य जगन्नाथ अभ्यंकर को उपसभापति पद का उम्मीदवार बनाया था। हालांकि, संसदीय कार्य मंत्री चंद्रकांत पाटील ने सदन की परंपरा का हवाला देते हुए विपक्ष से चुनाव निर्विरोध कराने की अपील की।
इसके बाद शिवसेना यूबीटी के विधान परिषद सदस्य अनिल परब ने अभ्यंकर की उम्मीदवारी वापस लेने की घोषणा की। विपक्ष के पीछे हटने के साथ ही सचिन अहिर को सर्वसम्मति से उपसभापति चुन लिया गया।
विधान परिषद में महायुति के पास पहले से ही स्पष्ट बहुमत है। चुनाव से पहले उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भाजपा के पास 35, शिंदे शिवसेना के पास 12 और सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के पास 10 सदस्य थे। इसके मुकाबले शिवसेना यूबीटी, कांग्रेस और एनसीपी-शरद पवार गुट का संयुक्त संख्या बल काफी कम था। ऐसे में चुनाव होने की स्थिति में भी महायुति उम्मीदवार की जीत लगभग तय मानी जा रही थी।
आदित्य ठाकरे ने साधा निशाना
सचिन अहिर के पार्टी छोड़ने के बाद शिवसेना यूबीटी नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि उनकी पार्टी पिछले चार वर्षों में कई नेताओं को जाते हुए देख चुकी है और इस घटनाक्रम से हैरान नहीं है। उन्होंने दावा किया कि अहिर को पार्टी और उससे जुड़े संगठनों में कई जिम्मेदारियां दी गई थीं।
आदित्य ठाकरे ने शिंदे शिवसेना के कथित ‘ऑपरेशन टाइगर’ पर निशाना साधते हुए इसे “ऑपरेशन देवेंद्र फडणवीस” करार दिया। उन्होंने यह भी दावा किया कि नेताओं के आने-जाने के बावजूद वर्ली शिवसेना का मजबूत गढ़ बना रहेगा।
एनसीपी से शुरू हुआ था राजनीतिक सफर
सचिन अहिर इससे पहले अविभाजित राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के मुंबई अध्यक्ष रह चुके हैं। वह तीन बार विधायक चुने गए और कांग्रेस-एनसीपी सरकार में मंत्री भी रहे। वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में उन्हें वर्ली सीट से हार का सामना करना पड़ा था।
साल 2019 में आदित्य ठाकरे के पहला विधानसभा चुनाव लड़ने से पहले अहिर ने अविभाजित शिवसेना का दामन थामा था। वर्ष 2022 में वह महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य निर्वाचित हुए और उनका वर्तमान कार्यकाल 2028 तक है। अब उपसभापति पद मिलने के बाद शिंदे शिवसेना की विधान परिषद में स्थिति और मजबूत हुई है।
सचिन अहिर के इस राजनीतिक कदम के बाद महाराष्ट्र में विपक्षी दलों के अन्य नेताओं के भी महायुति में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि, विपक्ष ने सत्तारूढ़ गठबंधन पर दलों को तोड़ने की राजनीति करने का आरोप लगाया है, जबकि महायुति नेताओं का कहना है कि विपक्षी नेता अपनी इच्छा से उनके साथ आ रहे हैं।

