‘वंदे मातरम्’ के सभी छह अंतरे गाने और इससे जुड़े कानूनी प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार से दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। याचिका में वंदे मातरम् के छह अंतरे गाने से जुड़े निर्देश और हालिया कानूनी संशोधन को चुनौती दी गई है। अदालत ने खास तौर पर इस बात की जांच की जरूरत बताई कि किसी व्यक्ति के वंदे मातरम् नहीं गाने पर आपराधिक या कानूनी सजा का प्रावधान किस हद तक लागू हो सकता है।
करीब 80 साल बाद अनिवार्यता का दावा
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. एस. मुरलीधर ने दलील दी कि करीब 80 साल बाद पहली बार वंदे मातरम् के कुछ हिस्सों को लोगों पर अनिवार्य रूप से लागू करने की स्थिति बन रही है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को इसे नहीं गाने पर सजा देने का प्रावधान गंभीर सवाल खड़े करता है।
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि इस तरह के बदलाव को लागू करने से पहले लोगों के बीच व्यापक सहमति होनी चाहिए थी। अदालत के समक्ष यह मुद्दा भी रखा गया कि राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़े प्रावधानों को लागू करते समय नागरिकों के मौलिक अधिकारों को ध्यान में रखना जरूरी है।
छह अंतरे गाने के निर्देश को दी गई चुनौती
यह याचिका कर्नाटक संगीतकार टी.एम. कृष्णा ने दायर की है। इसमें केंद्र सरकार के उस निर्देश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के सभी छह अंतरे गाने की बात कही गई है। याचिका में हाल में किए गए उस कानूनी संशोधन को भी चुनौती दी गई है, जिसके तहत राष्ट्रीय गीत को कानूनी संरक्षण के दायरे में लाया गया है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि वंदे मातरम् के बाद के कुछ अंतरों में हिंदू देवी-देवताओं के प्रति भक्ति का उल्लेख है। इसी आधार पर याचिका में तर्क दिया गया है कि इन हिस्सों का गायन अनिवार्य करना नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता और अंतरात्मा की स्वतंत्रता से जुड़े सवाल खड़े करता है।
सुप्रीम कोर्ट ने सजा के प्रावधान पर जताई जांच की जरूरत
सुप्रीम कोर्ट ने इस स्तर पर यह तय करने से इनकार किया कि वंदे मातरम् के दो अंतरे गाए जाने चाहिए या सभी छह। अदालत ने इसके बजाय यह जांचने पर ध्यान केंद्रित किया कि किसी व्यक्ति द्वारा इसे नहीं गाने पर आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है या नहीं। अदालत ने इस संबंध में पहले के एक फैसले का भी संदर्भ दिया, जिसमें धार्मिक या अंतरात्मा के आधार पर राष्ट्रगान नहीं गाने वाले लोगों के अधिकारों पर विचार किया गया था।
केंद्र सरकार ने याचिका का विरोध किया
सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् को लेकर दो अंतरे गाए जाएं या छह, यह सरकार के स्तर पर तय किया जाने वाला विषय है।
वहीं, कोर्ट ने केंद्र को याचिका की प्रति उपलब्ध कराने और दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अब मामले की आगे की सुनवाई केंद्र के जवाब के बाद होगी।

