भारत-जर्मनी के बीच 6 पनडुब्बियों की मेगा डील की तैयारी, मझगांव डॉक में होगा निर्माण
भारत और जर्मनी के बीच रक्षा क्षेत्र में एक बड़ी डील की तैयारी चल रही है, जिसके तहत 6 अत्याधुनिक पारंपरिक पनडुब्बियों का निर्माण भारत में किया जाएगा। इस परियोजना की अनुमानित लागत 70,000 करोड़ रुपये से 99,000 करोड़ रुपये (लगभग 8–12 अरब डॉलर) के बीच बताई जा रही है।
मझगांव डॉक में होगा निर्माण
इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के तहत पनडुब्बियों का निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) में किया जाएगा। इस दौरान जर्मनी की प्रमुख रक्षा कंपनी थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स तकनीकी सहयोग प्रदान करेगी।
यह डील भारत के “मेक इन इंडिया” और आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन अभियान के लिए एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
राजनाथ सिंह के जर्मनी दौरे में हो सकता है बड़ा फैसला
भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 21 से 23 अप्रैल तक जर्मनी के आधिकारिक दौरे पर हैं। इस यात्रा के दौरान वे जर्मन रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस और अन्य शीर्ष नेताओं से मुलाकात करेंगे।
इसी दौरान दोनों देशों के बीच इस पनडुब्बी डील को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है। यह दौरा भारत-जर्मनी रणनीतिक रक्षा साझेदारी को मजबूत करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रोजेक्ट 75I के तहत बड़ी योजना
यह डील भारत के प्रोजेक्ट 75I-P75I का हिस्सा है, जिसके तहत भारतीय नौसेना को नई पीढ़ी की एडवांस्ड डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां मिलेंगी। इन पनडुब्बियों को अत्याधुनिक तकनीक से लैस किया जाएगा, जिससे भारत की समुद्री सुरक्षा क्षमता और मजबूत होगी।
रक्षा सहयोग में तकनीकी साझेदारी पर जोर
दोनों देशों के बीच बातचीत में रक्षा उद्योग सहयोग को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके तहत साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन टेक्नोलॉजी और अन्य उभरती सैन्य तकनीकों में साझेदारी की संभावनाएं तलाशी जाएंगी।
इसके अलावा “मेक इन इंडिया” के तहत संयुक्त उत्पादन और तकनीक हस्तांतरण पर भी चर्चा होगी।
संभावित समझौते और एजेंडा
इस दौरे के दौरान कई अहम समझौते होने की संभावना है, जिनमें शामिल हैं—
- रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप पर हस्ताक्षर
- संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में सहयोग
- सैन्य प्रशिक्षण और अभ्यास में साझेदारी
- रक्षा कंपनियों के साथ निवेश और तकनीकी सहयोग
7 साल बाद जर्मनी दौरे पर भारतीय रक्षा मंत्री
यह सात साल बाद किसी भारतीय कैबिनेट मंत्री की जर्मनी की आधिकारिक यात्रा है। इससे पहले 2019 में तत्कालीन रक्षा मंत्री ने जर्मनी का दौरा किया था, जबकि जून 2023 में जर्मन रक्षा मंत्री भारत आए थे।
निष्कर्ष
भारत और जर्मनी के बीच यह संभावित पनडुब्बी डील न केवल रक्षा क्षेत्र में सहयोग को नई ऊंचाई देगी, बल्कि भारत की समुद्री ताकत और तकनीकी आत्मनिर्भरता को भी मजबूत करेगी। आने वाले दिनों में इस डील पर आधिकारिक घोषणा की उम्मीद की जा रही है।

