4 Jul 2026, Sat

मोदी सरकार का UAPA के तहत बड़ा एक्शन, जैश-लश्कर से जुड़े 23 लोगों को घोषित किया आतंकी; देखें पूरी लिस्ट

केंद्र सरकार ने आतंकवाद और सीमा पार आतंकी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान में मौजूद 23 लोगों को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत आतंकवादी घोषित किया है। गृह मंत्रालय की ओर से शुक्रवार, 3 जुलाई 2026 को जारी अलग-अलग गजट अधिसूचनाओं में इन लोगों के नाम UAPA की चौथी अनुसूची में शामिल किए गए। इनका संबंध जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और अन्य प्रतिबंधित संगठनों से बताया गया है।

सरकार के अनुसार, ये लोग आतंकियों की भर्ती, प्रशिक्षण, फंडिंग, हथियार उपलब्ध कराने, घुसपैठ करवाने और जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमलों की साजिश रचने जैसी गतिविधियों में शामिल रहे हैं। इस कार्रवाई के बाद UAPA के तहत व्यक्तिगत रूप से आतंकवादी घोषित लोगों की संख्या बढ़कर 80 हो गई है।

सुनजवां हमले से जुड़े आरोपियों के नाम शामिल

गृह मंत्रालय की अधिसूचना में मसूद इलियास कश्मीरी को जैश-ए-मोहम्मद का वरिष्ठ सदस्य बताया गया है। वह पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर के रावलकोट में रहता है। सरकार के अनुसार, वह युवाओं को जैश में भर्ती करने, आतंकी प्रशिक्षण देने और आतंकियों की भारत में घुसपैठ कराने में शामिल रहा है।

अधिसूचना में उसे 22 अप्रैल 2022 को जम्मू के सुनजवां में सुरक्षाबलों पर हुए आतंकी हमले से भी जोड़ा गया है। मोहम्मद मुसद्दिक उर्फ डॉक्टर पर भी सुनजवां हमले के लिए आतंकियों की घुसपैठ और ऑपरेशन का समन्वय करने के आरोप हैं।

नागरोटा हमले से जुड़े लोग भी घोषित आतंकी

लिस्ट में मुफ्ती मोहम्मद असगर खान उर्फ अबू साद, हाफिज अब्दुल शकूर उर्फ कारी जरार और अब्दुल्ला जेहादी जैसे जैश से जुड़े लोगों के नाम भी शामिल हैं। इन्हें साल 2016 में हुए नागरोटा आर्मी कैंप हमले से संबंधित घुसपैठ, आतंकी नेटवर्क और लॉजिस्टिक सहायता से जोड़ा गया है।

इसके अलावा फिरदौस अहमद भट, बिलाल अहमद मीर, आबिद कयूम लोन, नजीर अहमद गुर्जर, अब्दुल रऊफ, अशफाक अहमद और हाफिज खालिद वलीद सहित कई लोगों को लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा बताया गया है। बिलाल अहमद मीर पर लश्कर और उसके सहयोगी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट के लिए सीमा पार से हथियारों की आपूर्ति और आतंकी गतिविधियां संचालित करने का आरोप है।

UAPA के तहत कार्रवाई का क्या होगा असर?

UAPA की धारा 35 केंद्र सरकार को किसी व्यक्ति का नाम कानून की चौथी अनुसूची में शामिल कर उसे आतंकवादी घोषित करने का अधिकार देती है। वर्ष 2019 में कानून में संशोधन कर संगठनों के साथ व्यक्तियों को भी आतंकवादी घोषित करने का प्रावधान जोड़ा गया था।

किसी व्यक्ति को आतंकवादी घोषित किए जाने के बाद सुरक्षा और जांच एजेंसियां उसके वित्तीय नेटवर्क पर कार्रवाई कर सकती हैं। इससे संपत्तियां जब्त करने, बैंक खातों और फंडिंग के स्रोतों को रोकने तथा हथियारों की आपूर्ति पर प्रतिबंध लगाने जैसी कार्रवाई का रास्ता साफ होता है।

सरकार का कहना है कि यह कदम सीमा पार आतंकवाद के नेटवर्क, वित्तीय सहायता, हथियारों की सप्लाई और आतंकी भर्ती व्यवस्था को कमजोर करने की दिशा में उठाया गया है।

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