20 May 2026, Wed

मोदी-मेलोनी के Melody वीडियो के बाद जिस शेयर को खरीदने की मची है होड़, उसका असली बिजनेस जानकर घूम जाएगा आपका सिर!

इटली दौरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की एक वायरल वीडियो ने न सिर्फ सोशल मीडिया पर धूम मचा दी, बल्कि इसका असर भारतीय शेयर बाजार तक देखने को मिला। इस वीडियो में पीएम मोदी द्वारा मेलोनी को ‘मेलोडी’ टॉफी गिफ्ट किए जाने का दृश्य सामने आते ही इंटरनेट पर “Melody” ट्रेंड करने लगा और निवेशकों के बीच एक अजीब सी हलचल पैदा हो गई।

सोशल मीडिया पर वीडियो तेजी से वायरल होने के बाद कई निवेशकों ने जल्दबाजी में “Parle” नाम को देखकर शेयर खरीदना शुरू कर दिया। इसी वजह से पारले इंडस्ट्रीज के शेयरों में अचानक तेज उछाल देखने को मिला और स्टॉक में भारी खरीदारी दर्ज की गई। बुधवार के कारोबार के दौरान कंपनी का शेयर 5 प्रतिशत के अपर सर्किट के साथ 5.25 रुपये तक पहुंच गया।

हालांकि असल कहानी में सबसे बड़ी गलती यहीं हुई। मेलोडी टॉफी बनाने वाली असली कंपनी पारले प्रोडक्ट्स है, जो पारले-जी बिस्कुट, मोनाको, हाइड एंड सीक और मैंगो बाइट जैसे लोकप्रिय ब्रांड्स के लिए जानी जाती है। लेकिन यह कंपनी शेयर बाजार में लिस्टेड ही नहीं है। दूसरी ओर, जिन पारले इंडस्ट्रीज के शेयरों में तेजी देखी गई, उनका टॉफी या बिस्कुट कारोबार से कोई संबंध नहीं है।

यानी केवल नाम की समानता के कारण निवेशकों ने गलत कंपनी के शेयर खरीद लिए और इसी वजह से स्टॉक में अचानक उछाल देखने को मिला। यह स्थिति पूरी तरह से एक “कन्फ्यूजन रैली” बन गई, जहां सोशल मीडिया ट्रेंड ने निवेशकों के फैसले को प्रभावित कर दिया।

पारले इंडस्ट्रीज मुख्य रूप से रियल एस्टेट, इंफ्रास्ट्रक्चर और पेपर वेस्ट रीसाइक्लिंग के कारोबार में काम करती है। हालांकि इसका नाम पहले पारले-बिसलरी ग्रुप से जुड़ा था, लेकिन अब इसका उस ग्रुप से कोई सीधा संबंध नहीं है।

इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि शेयर बाजार में सिर्फ वायरल खबरों या सोशल मीडिया ट्रेंड के आधार पर निवेश करना कितना खतरनाक हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, बिना पूरी जानकारी के किए गए निवेश अक्सर गलत फैसलों की ओर ले जाते हैं, जिससे निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

बाजार जानकारों का कहना है कि किसी भी कंपनी में निवेश करने से पहले उसके फंडामेंटल्स, बिजनेस मॉडल और वास्तविक पहचान को समझना बेहद जरूरी है। इस तरह की घटनाएं निवेशकों को यह सीख देती हैं कि भावनाओं या ट्रेंड के बजाय रिसर्च के आधार पर ही फैसले लेने चाहिए।

फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया और निवेश दोनों जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग इसे “वायरल इफेक्ट ऑन स्टॉक्स” का नया उदाहरण बता रहे हैं।

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