29 Jul 2026, Wed

‘मोदी जी को लोग भगवान मानते हैं, सम्मान करना पड़ेगा’, ‘जेनरेशन गटर’ बयान पर घिरीं कंगना रनौत, अब दी सफाई

मुंबई: अभिनेत्री और भारतीय जनता पार्टी की सांसद कंगना रनौत एक बार फिर अपने बयान को लेकर विवादों में हैं। हाल ही में युवा हिंदू महिलाओं की जीवनशैली और भाषा पर टिप्पणी करते हुए उन्हें ‘जेनरेशन गटर’ कहने के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। विवाद बढ़ने पर कंगना रनौत ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा कर अपने बयान पर सफाई दी और कहा कि उनका उद्देश्य समाज में मर्यादा, अनुशासन और नागरिक बोध की आवश्यकता पर जोर देना था।

वीडियो संदेश में कंगना ने मीडिया पर उनके बयान को संदर्भ से हटाकर पेश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उनके पूरे वक्तव्य को दिखाने के बजाय केवल विवादित हिस्से को प्रचारित किया गया, ताकि टीआरपी और सोशल मीडिया एंगेजमेंट बढ़ाया जा सके। कंगना के अनुसार उन्होंने हाल ही में स्काईरूट कार्यक्रम की सफलता पर बधाई दी थी और नीट परीक्षा देने वाले छात्रों को शुभकामनाएं भी दी थीं, लेकिन इन सकारात्मक बातों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।

कंगना ने कहा कि समाज में अश्लील भाषा और अभद्र व्यवहार को सामान्य नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने अपने बयान का बचाव करते हुए कहा कि कोई भी परिवार यह नहीं चाहेगा कि उसके बच्चों को अपमानजनक या यौन संकेत देने वाले शब्दों से संबोधित किया जाए। उनके अनुसार सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा बनाए रखना जरूरी है और इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

अपने वीडियो में कंगना ने नारीवाद के कुछ स्वरूपों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अनुशासन और गरिमा को महिलाओं पर बोझ बताना उचित नहीं है। उनके अनुसार समाज में रहने के लिए कुछ नियम और सीमाएं जरूरी होती हैं। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है, लेकिन उसकी एक सीमा है और वह सीमा वहां समाप्त होती है जहां दूसरे व्यक्ति के अधिकार और सम्मान शुरू होते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण देते हुए कंगना ने कहा कि देश में अलग-अलग लोग उन्हें अलग-अलग नजरिए से देखते हैं। कुछ बच्चे उन्हें अपना ‘एग्जाम बडी’ मानते हैं, कई लोग उन्हें अपना नेता, प्रेरणा या आराध्य मानते हैं। ऐसे में सार्वजनिक मंचों पर किसी के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना दूसरों की भावनाओं को आहत कर सकता है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति या उसके परिवार के लिए अपशब्द कहना आधुनिकता या ‘कूल’ होने की निशानी नहीं है।

कंगना रनौत ने युवाओं से अपील की कि वे सोशल मीडिया संस्कृति के प्रभाव में आकर अशिष्ट भाषा और व्यवहार को सामान्य न मानें। उन्होंने कहा कि नागरिक बोध, सार्वजनिक शिष्टाचार और दूसरों के प्रति सम्मान लोकतांत्रिक समाज की बुनियादी जरूरतें हैं। उनके अनुसार स्वतंत्रता और जिम्मेदारी साथ-साथ चलनी चाहिए।

कंगना के इस वीडियो के बाद भी सोशल मीडिया पर बहस जारी है। कुछ लोग उनके अनुशासन और सार्वजनिक मर्यादा संबंधी विचारों का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कई लोगों का कहना है कि उनकी मूल टिप्पणी अनावश्यक और आपत्तिजनक थी। फिलहाल यह विवाद राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *