1 Jul 2026, Wed

मानसून की एंट्री के साथ हिमाचल में शुरू हुआ मौत और तबाही का सिलसिला, 44 सड़कें बंद, 254 बिजली ट्रांसफॉर्मर ठप

शिमला: हिमाचल प्रदेश में मानसून के पहुंचते ही भारी बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। राज्य के कई इलाकों में भूस्खलन, पहाड़ों से पत्थर गिरने और अचानक नालों का जलस्तर बढ़ने की घटनाएं सामने आई हैं। बारिश से प्रदेशभर में 44 सड़कें बंद हो गई हैं, जबकि 254 बिजली वितरण ट्रांसफॉर्मर ठप होने से कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है। मंडी जिला बारिश से सबसे ज्यादा प्रभावित बताया जा रहा है।

पहाड़ी से गिरे पत्थर की चपेट में आई महिला

मंडी जिले के औट क्षेत्र में बुधवार सुबह दर्दनाक हादसा हुआ। नालागढ़ निवासी एक महिला अपने परिवार के साथ कार में यात्रा कर रही थी। औट स्थित शनि मंदिर के पास अचानक उसकी तबीयत खराब हो गई और परिवार ने गाड़ी रोक दी। महिला उल्टी करने के लिए कार से बाहर निकली, तभी पहाड़ी से लुढ़कता हुआ बड़ा पत्थर उसके ऊपर गिर गया। गंभीर चोट लगने के कारण महिला ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

सूचना मिलने के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। प्रशासन ने लगातार बारिश के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में सफर करने वाले लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।

मंडी में सबसे अधिक नुकसान

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार मंडी जिले में 28 सड़कें बंद हैं और 198 बिजली ट्रांसफॉर्मर काम नहीं कर रहे हैं। कुल्लू में 11 सड़कें और 11 ट्रांसफॉर्मर प्रभावित हुए हैं। लाहौल-स्पीति में एक सड़क तथा एक ट्रांसफॉर्मर बाधित हुआ है, जबकि ऊना जिले में दो सड़कें बंद होने की सूचना है। विभागों की टीमें सड़कों को खोलने और बिजली आपूर्ति बहाल करने के काम में जुटी हुई हैं।

लाहौल-स्पीति में तेज बहाव और अचानक आई बाढ़ से सड़क संपर्क भी प्रभावित हुआ। जिस्पा क्षेत्र में मलबा और पानी आने के कारण मनाली-लेह मार्ग पर बड़ी संख्या में वाहन फंस गए थे। सीमा सड़क संगठन ने राहत अभियान चलाकर करीब एक हजार वाहनों को सुरक्षित निकाला और पानी का स्तर कम होने के बाद मार्ग बहाल किया। हालांकि प्रशासन ने यात्रियों को मौसम की स्थिति देखकर ही सफर करने की सलाह दी है।

कांगड़ा में 102.5 मिलीमीटर बारिश

पिछले 24 घंटों के दौरान कांगड़ा जिले के नगरोटा सूरियां में सर्वाधिक 102.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। घमरूर में 95.2 मिलीमीटर, गुलेर में 87.2 मिलीमीटर, पालमपुर में 74.4 मिलीमीटर और चंबा के सलोनी क्षेत्र में 68.2 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड हुई। शिमला, मनाली और धर्मशाला में भी बारिश जारी रही, जबकि कई स्थानों पर गरज और बिजली चमकने की घटनाएं सामने आईं।

सात जुलाई तक भारी बारिश की चेतावनी

मौसम केंद्र शिमला ने सात जुलाई तक प्रदेश में बारिश जारी रहने का पूर्वानुमान जारी किया है। दो, तीन, पांच और छह जुलाई को अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। किन्नौर और लाहौल-स्पीति में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। तापमान में भी गिरावट आने का अनुमान है।

प्रशासन ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों से नदी-नालों के पास नहीं जाने, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने और खराब मौसम में अनावश्यक यात्रा टालने की अपील की है। यात्रा से पहले सड़क और मौसम की ताजा स्थिति जांचने की भी सलाह दी गई है।

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