4 Aug 2026, Tue

मध्य प्रदेश में कब होंगे छात्रसंघ चुनाव? सरकार ने हाईकोर्ट को बताया, सौंपा कैलेंडर

मध्य प्रदेश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव कराने का रास्ता आखिरकार साफ हो गया है। करीब नौ साल से बंद पड़ी चुनाव प्रक्रिया को दोबारा शुरू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय में शैक्षणिक कैलेंडर पेश किया, जिसमें सितंबर 2026 में छात्रसंघ चुनाव कराने का स्पष्ट उल्लेख किया गया है। इसके बाद जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इस मामले में दायर जनहित याचिका का निस्तारण कर दिया।

यह फैसला राज्य के लाखों छात्रों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से छात्र संगठन और विद्यार्थी प्रतिनिधि चुनाव बहाल करने की मांग कर रहे थे।

हाई कोर्ट में हुई अहम सुनवाई

इस मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगल पीठ ने की। यह जनहित याचिका छात्र नेता अदनान अंसारी की ओर से दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि वर्ष 2017 से सरकारी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव नहीं कराए गए, जबकि छात्रों से चुनाव शुल्क लगातार वसूला जाता रहा।

याचिकाकर्ता का तर्क था कि चुनाव न कराना विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है और इससे शैक्षणिक संस्थानों में छात्र प्रतिनिधित्व की व्यवस्था प्रभावित हुई है।

सितंबर में चुनाव कराने की तैयारी

उच्च शिक्षा विभाग की ओर से अदालत में वर्ष 2026-27 के लिए शैक्षणिक कैलेंडर प्रस्तुत किया गया। इसमें सितंबर महीने के दौरान छात्रसंघ चुनाव आयोजित करने की योजना शामिल है। सरकार की इस स्पष्ट समयसीमा के बाद अदालत ने माना कि चुनाव प्रक्रिया शुरू करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जा चुके हैं और इसी आधार पर याचिका का निस्तारण कर दिया गया।

सरकार के इस फैसले से प्रदेश के सभी शासकीय कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्र राजनीति एक बार फिर सक्रिय होने की संभावना है।

लिंगदोह समिति की सिफारिशों पर जोर

सुनवाई के दौरान लिंगदोह समिति की सिफारिशों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। याचिकाकर्ता ने कहा कि छात्रसंघ चुनावों के संचालन में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया। इसी कारण हाई कोर्ट ने पहले सरकार को निर्देश दिया था कि वह चुनाव प्रक्रिया के लिए स्पष्ट शैक्षणिक कैलेंडर और कार्ययोजना प्रस्तुत करे।

अब सरकार द्वारा चुनाव कार्यक्रम पेश किए जाने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि चुनाव लिंगदोह समिति के दिशा-निर्देशों के अनुरूप कराए जाएंगे।

शांतिपूर्ण चुनाव के लिए अदालत के निर्देश

चुनाव प्रक्रिया के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने को लेकर भी अदालत ने महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। हाई कोर्ट ने सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और महाविद्यालयों के प्राचार्यों से कहा है कि वे चुनाव को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए आवश्यक प्रशासनिक कदम उठाएं।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन की सहायता ली जाए, ताकि किसी भी प्रकार की हिंसा, अव्यवस्था या दबाव की स्थिति से बचा जा सके।

छात्र राजनीति को मिलेगा नया मंच

मध्य प्रदेश में छात्रसंघ चुनाव लंबे समय से बंद रहने के कारण छात्र नेतृत्व का एक बड़ा मंच लगभग निष्क्रिय हो गया था। चुनाव बहाल होने से विद्यार्थियों को अपनी समस्याएं लोकतांत्रिक तरीके से उठाने का अवसर मिलेगा। साथ ही विश्वविद्यालय और कॉलेज प्रशासन के साथ संवाद की संस्थागत व्यवस्था भी मजबूत होने की संभावना है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि छात्रसंघ चुनाव केवल प्रतिनिधियों के चयन तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे युवाओं में नेतृत्व क्षमता, संगठन कौशल और लोकतांत्रिक मूल्यों को भी मजबूत करते हैं।

अब सभी की नजर सितंबर में होने वाले चुनावों की तैयारियों और उनके संचालन पर टिकी है, क्योंकि नौ साल बाद होने वाले ये चुनाव राज्य की छात्र राजनीति के लिए एक नए दौर की शुरुआत माने जा रहे हैं।

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