4 Sep 2026, Fri

भारतीय वायुसेना करने जा रही 17 दिन का युद्धाभ्यास, NOTAM जारी, घबराए पाकिस्तान ने बुलाई आपात बैठक, निगरानी बढ़ाई

भारतीय वायुसेना आने वाले दिनों में एक बड़े और लंबे युद्धाभ्यास की तैयारी कर रही है। इसके लिए हवाई क्षेत्र को लेकर NOTAM यानी ‘नोटिस टू एयरमेन’ जारी किया गया है। प्रस्तावित अभ्यास करीब 17 दिनों तक चलने वाला है और इसमें पश्चिमी भारत के महत्वपूर्ण इलाकों में वायुसेना की ऑपरेशनल तैयारियों को परखा जाएगा। अभ्यास को लेकर जारी जानकारी के बाद सीमावर्ती क्षेत्र में भी गतिविधियों पर नजर बढ़ गई है।

बताया गया है कि यह युद्धाभ्यास 21 सितंबर से 7 अक्टूबर तक चल सकता है। इसके लिए जैसलमेर, बाड़मेर, फलोदी और जोधपुर के आसपास के हवाई क्षेत्र को अभ्यास के लिहाज से निर्धारित किया गया है। इसके अलावा बीकानेर के पास स्थित एक हवाई क्षेत्र को भी निर्धारित अवधि के दौरान बंद रखने की सूचना दी गई है।

17 दिन तक चलेगा बड़ा हवाई अभ्यास

युद्धाभ्यास के लिए निर्धारित क्षेत्र काफी बड़ा है और यह करीब 40 हजार फीट की ऊंचाई तक फैला हुआ बताया गया है। इतने लंबे समय तक चलने वाले अभ्यास का उद्देश्य केवल विमानों की उड़ान क्षमता को परखना नहीं, बल्कि युद्ध जैसी परिस्थितियों में अलग-अलग ऑपरेशनल प्रक्रियाओं की समीक्षा करना भी होता है।

इस दौरान वायुसेना के लड़ाकू विमानों और अन्य संसाधनों की तैनाती, संचालन और आपसी तालमेल को परखा जा सकता है। लंबे अभ्यास से सैन्यकर्मियों को वास्तविक परिस्थितियों के करीब प्रशिक्षण हासिल करने का अवसर मिलता है।

पश्चिमी सीमा के पास बढ़ी निगरानी

अभ्यास की जानकारी सामने आने के बाद भारत-पाकिस्तान सीमा के आसपास गतिविधियों पर चर्चा तेज हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की ओर से भी सीमावर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई है और वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों के स्तर पर इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा हुई है।

हालांकि, सैन्य अभ्यास का ऐलान अपने आप में किसी संभावित सैन्य कार्रवाई का संकेत नहीं माना जाना चाहिए। ऐसे अभ्यास नियमित सैन्य तैयारियों का हिस्सा होते हैं और इनका उद्देश्य सेनाओं की क्षमता, समन्वय तथा प्रतिक्रिया प्रणाली को मजबूत करना होता है।

‘तरंग शक्ति’ से भी जुड़ सकता है अभ्यास

जोधपुर में सितंबर के अंतिम सप्ताह से अक्टूबर के शुरुआती दिनों के बीच एक बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास आयोजित होने की संभावना भी बताई गई है। इसमें अलग-अलग देशों की वायु सेनाओं के शामिल होने की बात सामने आई है। ऐसे में मौजूदा NOTAM और प्रस्तावित अवधि के बीच कुछ समानता दिखाई देती है।

अगर दोनों गतिविधियां एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं, तो भारतीय वायुसेना को देश और विदेश की वायु सेनाओं के साथ संयुक्त संचालन का अनुभव भी मिल सकता है। इससे अलग-अलग परिस्थितियों में तालमेल और सामरिक समन्वय को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।

क्या है भारतीय वायुसेना के अभ्यास का मकसद?

इस तरह के युद्धाभ्यास का सबसे बड़ा उद्देश्य वायुसेना की ऑपरेशनल तैयारियों को मजबूत करना होता है। इसमें विमानों की तैनाती, सैन्यकर्मियों की तैयारी, कम समय में प्रतिक्रिया देने की क्षमता, संचार व्यवस्था और अलग-अलग इकाइयों के बीच तालमेल की जांच की जाती है।

17 दिनों का यह अभ्यास भारतीय वायुसेना को लंबे समय तक लगातार ऑपरेशन जैसी परिस्थितियों में अपनी क्षमता परखने का अवसर देगा। NOTAM जारी होने के बाद संबंधित हवाई क्षेत्र में सामान्य उड़ानों के संचालन पर भी आवश्यक प्रतिबंध या बदलाव लागू किए जा सकते हैं। आने वाले दिनों में इस अभ्यास से जुड़ी गतिविधियों पर सभी की नजर बनी रहने की संभावना है।

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