15 May 2026, Fri

भारत-बांग्लादेश के रिश्ते हो सकते हैं पहले से भी ज्यादा खराब, तीस्ता नदी परियोजना के लिए चीन के चरणों में पहुंचा ढाका

तीस्ता नदी परियोजना पर बांग्लादेश-चीन की बढ़ती नजदीकी, भारत के लिए क्यों है चिंता की बात?

ढाका में हाल ही में हुई एक अहम कूटनीतिक हलचल ने दक्षिण एशिया की भू-राजनीति को फिर से चर्चा में ला दिया है। बांग्लादेश ने तीस्ता नदी पुनर्स्थापना परियोजना में चीन की भागीदारी और सहयोग की औपचारिक मांग की है। इस कदम को भारत-बांग्लादेश संबंधों में संभावित तनाव बढ़ाने वाला माना जा रहा है, क्योंकि तीस्ता नदी भारत और बांग्लादेश दोनों के लिए रणनीतिक और जीवन-रेखा जैसी अहमियत रखती है।

क्या है तीस्ता नदी परियोजना?

तीस्ता नदी पूर्वी हिमालय से निकलकर सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होकर बांग्लादेश में प्रवेश करती है। यह नदी बांग्लादेश के उत्तरी क्षेत्रों में सिंचाई, कृषि और आजीविका का मुख्य स्रोत मानी जाती है। इसी कारण “तीस्ता नदी समग्र प्रबंधन और पुनर्स्थापना परियोजना (TRCMRP)” को ढाका सरकार एक बड़े विकास कार्यक्रम के रूप में देख रही है।

हाल ही में बीजिंग में बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच इस परियोजना पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में चीन ने बांग्लादेश के विकास एजेंडे और बुनियादी ढांचे से जुड़े सहयोग को और मजबूत करने की इच्छा जताई।

चीन की एंट्री से क्यों बढ़ी भारत की चिंता?

तीस्ता नदी भारत के सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होकर गुजरती है और यह इलाका भारत के “सिलीगुड़ी कॉरिडोर” के बेहद करीब है, जिसे देश की रणनीतिक सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। यही कारण है कि चीन की इस परियोजना में रुचि भारत के लिए चिंता का विषय बन गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन अगर इस परियोजना में सक्रिय भूमिका निभाता है, तो यह केवल जल प्रबंधन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि क्षेत्रीय प्रभाव और रणनीतिक उपस्थिति को भी मजबूत कर सकता है।

भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर असर

भारत और बांग्लादेश के बीच पहले से ही कुछ मुद्दों को लेकर मतभेद रहे हैं, खासकर जल बंटवारे को लेकर। 1996 की गंगा जल संधि का भविष्य भी आने वाले समय में चर्चा का विषय बन सकता है। ऐसे में तीस्ता मुद्दा दोनों देशों के बीच एक और संवेदनशील कड़ी बनता दिख रहा है।

भारत ने पहले भी तीस्ता बेसिन के लिए तकनीकी सहयोग का प्रस्ताव दिया था, ताकि दोनों देशों के बीच सहयोगात्मक जल प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके। लेकिन ढाका का चीन की ओर झुकाव कूटनीतिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है।

चीन की रणनीति क्या है?

चीन लंबे समय से बांग्लादेश में निवेश और विकास परियोजनाओं के जरिए अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन बांग्लादेश का एक प्रमुख ऋणदाता भी है और वहां बुनियादी ढांचे से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स में शामिल रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की “बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव” के तहत यह कदम दक्षिण एशिया में उसके प्रभाव को और मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

निष्कर्ष

तीस्ता नदी परियोजना अब सिर्फ एक जल प्रबंधन योजना नहीं रह गई है, बल्कि यह भारत, बांग्लादेश और चीन के बीच बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का हिस्सा बनती जा रही है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर तीनों देशों के बीच कूटनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है, जिसका असर पूरे क्षेत्रीय संतुलन पर पड़ सकता है।

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