नई दिल्ली: भारत अपने समृद्ध इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और भव्य किलों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। जब भी देश के ऐतिहासिक किलों की बात होती है, तो अधिकांश लोगों के मन में सबसे पहले राजस्थान का नाम आता है। हालांकि, आंकड़े बताते हैं कि भारत में सबसे ज्यादा किले राजस्थान में नहीं, बल्कि महाराष्ट्र में मौजूद हैं। यही वजह है कि महाराष्ट्र को कई इतिहासकार और पर्यटन विशेषज्ञ ‘किलों की धरती’ भी कहते हैं।
महाराष्ट्र पर्यटन विभाग और विभिन्न ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, राज्य में 350 से अधिक किले मौजूद हैं। इनमें से अधिकांश किले मराठा साम्राज्य और विशेष रूप से छत्रपति शिवाजी महाराज के शासनकाल से जुड़े हुए हैं। दूसरी ओर, राजस्थान में लगभग 300 से 320 किलों का उल्लेख मिलता है। हालांकि राजस्थान के किले अपनी भव्यता और वास्तुकला के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं, लेकिन कुल संख्या के मामले में महाराष्ट्र आगे है।
इतिहासकारों के अनुसार, महाराष्ट्र में किलों की अधिक संख्या का प्रमुख कारण सह्याद्री पर्वत श्रृंखला और मराठा साम्राज्य की सैन्य रणनीति रही है। छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपने स्वराज्य की स्थापना और विस्तार के लिए किलों को आधार बनाया था। उन्होंने कई पुराने किलों को मजबूत कराया और अनेक नए किलों का निर्माण करवाया। ये किले केवल रक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक गतिविधियों, व्यापारिक निगरानी और गुरिल्ला युद्ध की रणनीतियों के केंद्र भी थे।
महाराष्ट्र के किलों की एक और खासियत यहां के समुद्री किले हैं। कोंकण तट पर स्थित सिंधुदुर्ग, विजयदुर्ग और मुरुद-जंजीरा जैसे किले भारतीय समुद्री सुरक्षा और मराठा नौसेना की ताकत का प्रतीक माने जाते हैं। इन किलों ने विदेशी आक्रमणों से पश्चिमी तट की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
राज्य के प्रमुख किलों में रायगढ़, शिवनेरी, सिंहगढ़, प्रतापगढ़ और तोरणा शामिल हैं। रायगढ़ किला छत्रपति शिवाजी महाराज की राजधानी और उनके राज्याभिषेक का साक्षी रहा है। वहीं, शिवनेरी किला शिवाजी महाराज का जन्मस्थान माना जाता है। सिंहगढ़ किला तानाजी मालुसरे की वीरता और बलिदान की कहानी के लिए प्रसिद्ध है, जबकि प्रतापगढ़ किला शिवाजी और अफजल खान के ऐतिहासिक युद्ध का गवाह रहा है।
हाल के वर्षों में महाराष्ट्र के किलों को अंतरराष्ट्रीय पहचान भी मिली है। यूनेस्को ने वर्ष 2025 में ‘Maratha Military Landscapes of India’ के तहत महाराष्ट्र के 11 ऐतिहासिक किलों को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया। इस उपलब्धि ने राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को वैश्विक स्तर पर और मजबूत किया है।
वर्तमान में महाराष्ट्र सरकार इन किलों को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर दे रही है। ट्रैकिंग रूट, रोपवे परियोजनाएं, डिजिटल मैपिंग और लाइट-एंड-साउंड शो जैसे कई प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, कई किले अब भी रखरखाव की कमी, प्राकृतिक क्षरण और अवैध निर्माण जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
इतिहास और रोमांच के शौकीनों के लिए महाराष्ट्र के किले केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि भारत के गौरवशाली अतीत और मराठा साम्राज्य की वीरता के जीवंत प्रतीक हैं। यही कारण है कि किलों की संख्या के मामले में महाराष्ट्र आज भी देश में पहले स्थान पर बना हुआ है।

