महाराष्ट्र: महाराष्ट्र विधान परिषद (MLC) चुनाव के नतीजों के बाद सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के भीतर मतभेद सामने आने लगे हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता नितेश राणे के बयान के बाद गठबंधन की सहयोगी शिवसेना के शिंदे गुट के नेता संजय निरुपम ने नाराजगी जताई है। दोनों नेताओं के बयानों से संकेत मिल रहे हैं कि चुनाव परिणामों को लेकर गठबंधन के भीतर चर्चा और आत्ममंथन की जरूरत महसूस की जा रही है।
नितेश राणे ने उठाया ‘शकुनी मामा’ का मुद्दा
MLC चुनाव के नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए नितेश राणे ने महायुति के भीतर किसी ऐसे व्यक्ति की भूमिका पर सवाल उठाया, जो गठबंधन के हितों के खिलाफ काम कर रहा हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह पता लगाना होगा कि गठबंधन में ‘शकुनी मामा’ कौन है।
राणे ने यह भी कहा कि महायुति के सभी नेताओं को एक साथ बैठकर चुनाव परिणामों की समीक्षा करनी चाहिए। उनके मुताबिक, यह समझना जरूरी है कि चुनाव में कहां चूक हुई और किस स्तर पर गलतियां हुईं। उन्होंने गठबंधन की एकजुटता पर जोर देते हुए कहा कि साथ रहने और एक-दूसरे का समर्थन करने की बात को व्यवहार में भी साबित करना होगा।
अपने बयान में राणे ने विपक्षी नेताओं पर भी टिप्पणी की और चुनाव परिणामों को लेकर राजनीतिक कटाक्ष किया। उनके बयान के बाद गठबंधन के भीतर आरोप-प्रत्यारोप की चर्चा तेज हो गई है।
संजय निरुपम ने आरोपों पर जताई आपत्ति
शिवसेना के शिंदे गुट के नेता संजय निरुपम ने भाजपा के कुछ नेताओं के रवैये पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव परिणाम सामने आने के बाद शिवसेना पर लगातार आरोप लगाना उचित नहीं है। उनके अनुसार, गठबंधन के सहयोगियों के बीच इस तरह की सार्वजनिक बयानबाजी से आपसी विश्वास प्रभावित हो सकता है।
निरुपम ने कहा कि इससे पहले भी नगर पंचायतों और नगर परिषदों के चुनावों में महायुति के घटक दलों के बीच दोस्ताना मुकाबले हुए हैं। हालांकि, उस समय सहयोगियों के बीच इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप देखने को नहीं मिले थे। उन्होंने मौजूदा स्थिति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि गठबंधन में इस तरह का व्यवहार नहीं होना चाहिए।
बातचीत से सुलझाने चाहिए मतभेद
संजय निरुपम ने कहा कि अगर चुनाव परिणामों को लेकर किसी सहयोगी दल को नाराजगी है, तो उसे सार्वजनिक मंच पर आरोप लगाने के बजाय गठबंधन के नेताओं के साथ बैठकर बातचीत करनी चाहिए। उन्होंने आपसी विश्वास और समन्वय को गठबंधन की मजबूती के लिए जरूरी बताया।
निरुपम ने भाजपा के चुनावी रवैये और गठबंधन के भीतर उसकी भूमिका पर भी विचार करने की जरूरत बताई। उनके मुताबिक, सहयोगी दलों के बीच मतभेद होना असामान्य नहीं है, लेकिन उन्हें सुलझाने का तरीका ऐसा होना चाहिए जिससे गठबंधन की एकता कमजोर न पड़े।
नतीजों के बाद गठबंधन की एकजुटता पर सवाल
महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव के बाद सामने आए इन बयानों ने महायुति के भीतर राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। एक ओर चुनाव परिणामों की समीक्षा और संभावित चूक की पहचान करने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर सार्वजनिक आरोप-प्रत्यारोप पर आपत्ति जताई जा रही है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि गठबंधन के वरिष्ठ नेता इन मतभेदों को दूर करने के लिए क्या कदम उठाते हैं। फिलहाल, दोनों नेताओं के बयान महायुति के भीतर चुनाव परिणामों को लेकर उभरी असहमति को सामने लाते हैं।

