पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट को लेकर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। राज्यसभा के एक मौजूदा सांसद का नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में नहीं मिलने और रिकॉर्ड में उनके नाम के आगे ‘पर्मानेंटली शिफ्टेड’ लिखे होने के बाद मामला चर्चा में आ गया है। संबंधित सांसद ने इसे सामान्य प्रशासनिक या क्लेरिकल गलती मानने से इनकार करते हुए राजनीतिक बदले का आरोप लगाया है।
मामला विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया से जुड़ा है। सामने आई जानकारी के मुताबिक, मतदाता रिकॉर्ड में संबंधित सांसद की एंट्री को स्थायी रूप से दूसरी जगह स्थानांतरित बताया गया है। सांसद का कहना है कि उनका वोटर आईडी पंजाब के मोहाली क्षेत्र में पंजीकृत है और उन्होंने वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में भी इसी क्षेत्र में मतदान किया था। ऐसे में मौजूदा ड्राफ्ट सूची में उन्हें ‘शिफ्टेड’ के तौर पर दर्ज किए जाने पर उन्होंने सवाल खड़े किए हैं।
‘सिर्फ क्लेरिकल गलती नहीं’, लगाए गंभीर आरोप
सांसद ने सोशल मीडिया के जरिए इस मामले पर अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि उनके नाम के आगे ‘पर्मानेंटली शिफ्टेड’ लिखा जाना महज किसी कर्मचारी की गलती नहीं माना जा सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किस अधिकारी ने उनके नाम को शिफ्टेड के तौर पर दर्ज किया, किस स्तर पर इसका सत्यापन हुआ और किस अधिकारी ने इस रिकॉर्ड को आगे प्रक्रिया में शामिल किया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में राज्य सरकार के अधिकारी चुनावी ड्यूटी निभा रहे हैं। इसी वजह से उन्होंने आशंका जताई कि प्रशासनिक स्तर पर राजनीतिक दबाव का इस्तेमाल किया गया हो सकता है। उनके मुताबिक, अधिकारियों की नियुक्ति, तबादले और सेवा संबंधी मामलों पर राज्य सरकार का प्रभाव होने के कारण इस तरह की कार्रवाई के पीछे राजनीतिक वजह होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
अंतिम सूची में हो सकता है बदलाव
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि फिलहाल सामने आई सूची ड्राफ्ट मतदाता सूची है। इसे अंतिम मतदाता सूची नहीं माना जाता। मतदाताओं को अपने नाम और विवरण से जुड़ी आपत्तियां दर्ज कराने तथा जरूरी दस्तावेजों के साथ दावा प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाता है।
संबंधित सांसद ने भी कहा है कि उन्होंने अपना नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए निर्धारित दावे और आपत्ति प्रक्रिया का सहारा लिया है। उनका कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया के बाद स्थिति स्पष्ट होगी और अंतिम मतदाता सूची में आवश्यक सुधार किया जा सकता है।
चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल-जवाब
मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी के बीच सत्तारूढ़ दल की ओर से यह कहा गया है कि SIR की प्रक्रिया चुनाव आयोग के अधीन आती है। ऐसे में मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या किसी मतदाता को दूसरी जगह स्थानांतरित दिखाने की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
अब सबकी नजरें अंतिम मतदाता सूची पर टिकी हैं। यदि दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के बाद नाम दोबारा शामिल होता है तो विवाद शांत हो सकता है, लेकिन यदि स्थिति बरकरार रहती है तो यह मामला पंजाब की राजनीति में और बड़ा मुद्दा बन सकता है।

