2 Nov 2026, Mon

नेशनल कॉन्फ्रेंस में बढ़ी अंदरूनी कलह, 18-20 विधायकों ने खोला बदलाव का मोर्चा, बोले- “नाराज हैं”

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर की सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस में अंदरूनी असंतोष बढ़ने की खबर सामने आई है। पार्टी के करीब 18 से 20 विधायक मौजूदा कामकाज और नेतृत्व के कुछ फैसलों से नाराज बताए जा रहे हैं। इन विधायकों ने संगठनात्मक ढांचे में बदलाव, वरिष्ठ नेताओं की जिम्मेदारियों की समीक्षा और सरकार में नए चेहरों को अवसर देने की मांग उठाई है। इस घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर राजनीतिक हलचल तेज कर दी है।

सूत्रों के अनुसार, असंतुष्ट विधायकों ने अपनी मांगों को लेकर एक ज्ञापन तैयार किया है, जिसे पार्टी अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला के सामने रखा गया है। विधायकों का कहना है कि पार्टी को मजबूत बनाने के लिए संगठन में सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है।

पुराने मंत्रियों को हटाकर नए नेताओं को मौका देने की मांग

पार्टी के भीतर नाराज विधायकों की प्रमुख मांग मंत्रिमंडल में बदलाव को लेकर है। बताया जा रहा है कि उन्होंने डिप्टी मुख्यमंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी सहित मौजूदा मंत्रियों को हटाकर नए चेहरों को सरकार में शामिल करने की मांग की है।

इसके अलावा मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सलाहकार नासिर असलम वानी की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। असंतुष्ट विधायकों की मांग है कि उन्हें तत्काल सलाहकार पद से हटाया जाए। उनका तर्क है कि चुनाव हारने के बावजूद उन्हें कैबिनेट मंत्री के समान दर्जा और सुविधाएं मिल रही हैं।

हालांकि, इन मांगों पर पार्टी नेतृत्व की ओर से क्या निर्णय लिया जाएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर होने वाली चर्चा पार्टी की आगे की रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है।

चुनावी घोषणापत्र लागू करने पर जोर

असंतुष्ट विधायकों ने सरकार और संगठन से चुनावी घोषणापत्र में किए गए वादों को पूरा करने की मांग भी की है। विशेष रूप से अनुच्छेद 370 और 35A की बहाली के लिए प्रयास तेज करने पर जोर दिया गया है।

विधायकों का मानना है कि पार्टी को जनता से किए गए वादों के प्रति जवाबदेह रहना चाहिए। उनके अनुसार, संगठन में पारदर्शिता बढ़ाने और निर्णय लेने की प्रक्रिया में अधिक नेताओं को शामिल करने की जरूरत है।

उनका कहना है कि पार्टी किसी एक व्यक्ति या सीमित समूह तक केंद्रित नहीं रहनी चाहिए। सामूहिक नेतृत्व और सभी वरिष्ठ नेताओं की भागीदारी से संगठन को मजबूत किया जा सकता है।

विधायकों ने बगावत की बात से किया इनकार

असंतुष्ट विधायकों ने अपनी नाराजगी को बगावत मानने से इनकार किया है। उनका कहना है कि वे पार्टी छोड़ने या संगठन को कमजोर करने के उद्देश्य से कोई कदम नहीं उठा रहे हैं। इसके बजाय, वे चाहते हैं कि नेतृत्व उनकी चिंताओं पर विचार करे और जरूरी सुधार लागू किए जाएं।

उनके मुताबिक, संगठन में बदलाव की मांग पार्टी के हित में है और इसे आंतरिक सुधार के तौर पर देखा जाना चाहिए।

मंत्रिमंडल विस्तार के बाद बढ़ी हलचल

बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के मंत्रिमंडल में फेरबदल और विस्तार के बाद पार्टी के कुछ नेताओं की नाराजगी सामने आई। इस घटनाक्रम के बीच मुबारक गुल, लारमी और नजीर गुरेजी जैसे नेताओं की असंतुष्टि की चर्चा भी हुई है।

फिलहाल पार्टी नेतृत्व के सामने संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने और विधायकों की मांगों पर विचार करने की चुनौती है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नेतृत्व इन सुझावों को स्वीकार करता है या पार्टी के भीतर असंतोष आगे भी बना रहता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *