3 Aug 2026, Mon

नीरज चोपड़ा ने कहा था भाले को एक लाइन में रखो, यशवीर सिंह ने CWG 2026 में ब्रॉन्ज जीतने के बाद किया खुलासा

भारतीय भाला फेंक खिलाड़ी यशवीर सिंह ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। लेकिन इस सफलता के पीछे केवल उनकी मेहनत ही नहीं, बल्कि ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा की अहम सलाह भी रही। मुकाबले के अंतिम दौर से पहले यशवीर मेडल की दौड़ से लगभग बाहर हो चुके थे, लेकिन नीरज की एक छोटी सी तकनीकी सलाह ने उनकी किस्मत बदल दी।

यशवीर सिंह आखिरी राउंड से पहले 81.33 मीटर के थ्रो के साथ सातवें स्थान पर थे। उस समय उनके लिए पदक जीतना बेहद मुश्किल दिखाई दे रहा था। तभी नीरज चोपड़ा ने उन्हें भाला फेंकने की तकनीक में एक महत्वपूर्ण सुधार करने की सलाह दी। यशवीर ने उस सलाह पर अमल किया और अपने अंतिम प्रयास में 85.41 मीटर का शानदार थ्रो फेंककर सीधे तीसरे स्थान पर पहुंच गए।

नीरज की सलाह बनी गेम चेंजर

यशवीर सिंह ने बाद में बताया कि नीरज चोपड़ा ने उन्हें कहा था कि भाला फेंकते समय उसे एक सीधी लाइन में रखें। उन्होंने बताया कि उन्होंने भाले को कान के पास सही स्थिति में पकड़ा, कंधों को सामने की दिशा में सीधा रखा और हाथ को पीछे ले जाकर उसी लाइन में ऊपर की ओर थ्रो किया।

यशवीर के अनुसार, इस छोटे से तकनीकी बदलाव ने उनके थ्रो की दिशा और दूरी दोनों में बड़ा अंतर पैदा किया। यही वजह रही कि उनका आखिरी प्रयास प्रतियोगिता का सबसे महत्वपूर्ण थ्रो साबित हुआ और वह ब्रॉन्ज मेडल जीतने में सफल रहे।

बिना दबाव के खेला मुकाबला

दिल्ली लौटने के बाद यशवीर सिंह ने बताया कि इस बड़े टूर्नामेंट में उन पर किसी तरह का अतिरिक्त दबाव नहीं था। उन्होंने कहा कि दर्शकों और मीडिया का पूरा ध्यान नीरज चोपड़ा, पाकिस्तान के अरशद नदीम, श्रीलंका के रूमेश थरंगा पथिरागे और ग्रेनाडा के एंडरसन पीटर्स जैसे बड़े खिलाड़ियों पर था।

यशवीर ने कहा कि उन्होंने खुद से केवल इतना कहा कि उन्हें अपना 100 प्रतिशत प्रदर्शन देना है और अपना सर्वश्रेष्ठ व्यक्तिगत रिकॉर्ड हासिल करना है। इसी सोच ने उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखा।

भारत ने जीते दो पदक

इस प्रतियोगिता में भारत ने जैवलिन थ्रो में दो पदक जीतकर शानदार प्रदर्शन किया। नीरज चोपड़ा ने 85.83 मीटर के थ्रो के साथ सिल्वर मेडल जीता, जबकि यशवीर सिंह ने 85.41 मीटर के साथ ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया।

यह भारतीय एथलेटिक्स के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि एक ही स्पर्धा में दो भारतीय खिलाड़ियों का पोडियम पर पहुंचना टीम की गहराई और प्रतिभा को दर्शाता है।

रूमेश पथिरागे बने गोल्ड मेडलिस्ट

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के जैवलिन थ्रो मुकाबले में श्रीलंका के रूमेश थरंगा पथिरागे ने 89.75 मीटर का थ्रो फेंककर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। उन्होंने पूरे मुकाबले में बेहतरीन प्रदर्शन किया और पहले स्थान पर रहे।

वहीं, पेरिस ओलंपिक 2024 के गोल्ड मेडलिस्ट अरशद नदीम इस बार उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सके। उनका सर्वश्रेष्ठ थ्रो 77.41 मीटर रहा और वह शीर्ष-8 में जगह बनाने में भी सफल नहीं हो पाए।

यशवीर सिंह की यह उपलब्धि केवल एक ब्रॉन्ज मेडल की कहानी नहीं है, बल्कि यह भारतीय खेल भावना और टीमवर्क का भी शानदार उदाहरण है। नीरज चोपड़ा ने एक सीनियर खिलाड़ी के रूप में जिस तरह अपने साथी खिलाड़ी की मदद की, उसने यह साबित कर दिया कि महान खिलाड़ी सिर्फ अपने प्रदर्शन से नहीं, बल्कि दूसरों को आगे बढ़ाने की सोच से भी पहचाने जाते हैं।

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