22 Sep 2026, Tue

ट्रंप ने सऊदी अरब को हूतियों से क्यों नहीं बचाया? आखिरी समय में टाल दिया हमले का प्लान

मध्य पूर्व में सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है। ईरान के समर्थन वाले हूती समूह ने सऊदी अरब के कई महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया है। इनमें राजधानी रियाद के साथ ईस्ट-वेस्ट क्रूड ऑयल पाइपलाइन भी शामिल है। हूतियों की बढ़ती गतिविधियों के बीच अमेरिका की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अब सामने आई जानकारी के मुताबिक, अमेरिका ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर ली थी, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आखिरी समय में हमला रोक दिया।

सऊदी क्राउन प्रिंस ने मांगी थी अमेरिकी मदद

जानकारी के अनुसार, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिका से हूती विद्रोहियों के खिलाफ मदद की अपील की थी। इसके बाद अमेरिकी सेना ने यमन में हूती ठिकानों पर संभावित हमले की तैयारी शुरू कर दी थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने 16 सितंबर को अपने सलाहकारों के सामने हूतियों के खिलाफ हमला करने को लेकर अपनी असहमति जताई थी। उस समय वह सैन्य कार्रवाई के पक्ष में नहीं थे। हालांकि, इसके बाद ट्रंप और सऊदी क्राउन प्रिंस के बीच बातचीत हुई।

बातचीत के बाद बदला था ट्रंप का फैसला

सऊदी क्राउन प्रिंस से बातचीत के बाद ट्रंप ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ हमले का आदेश दिया। इसके बाद पेंटागन ने संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए लक्ष्य तय किए। अमेरिकी सेना ने यमन में हूती ठिकानों पर हमला करने की तैयारी भी कर ली थी।

इस घटनाक्रम से यह संकेत मिला कि अमेरिका सऊदी अरब के अनुरोध पर हूती विद्रोहियों के खिलाफ सीधे सैन्य अभियान में शामिल हो सकता है। हालांकि, हमले की योजना पूरी तरह आगे बढ़ने से पहले ही स्थिति फिर बदल गई।

आखिरी समय में हमले से पीछे हटे ट्रंप

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेना हमले के लिए तैयार थी और लक्ष्यों की पहचान भी कर ली गई थी। इसके बावजूद राष्ट्रपति ट्रंप ने आखिरी समय में अपना फैसला एक बार फिर बदल दिया। उन्होंने प्रस्तावित हमले को रोक दिया और अमेरिका ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ तत्काल सैन्य कार्रवाई नहीं की।

इस फैसले के बाद यह सवाल उठने लगा कि आखिर अमेरिका ने सऊदी अरब की मदद के लिए तैयार किए गए सैन्य अभियान को अंतिम समय में क्यों रोक दिया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ट्रंप ने पहले हमले का विरोध किया, फिर सऊदी नेतृत्व से बातचीत के बाद हमले को मंजूरी दी और इसके बाद दोबारा अपना फैसला बदल लिया।

हूती हमलों से बढ़ा तनाव

हूती विद्रोही सऊदी अरब के बुनियादी ढांचे और लाल सागर में उसके जहाजों को निशाना बना रहे हैं। इसके अलावा बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के आसपास भी उनकी गतिविधियां बढ़ी हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है।

ऐसे समय में अमेरिका के संभावित सैन्य हस्तक्षेप और फिर आखिरी समय में पीछे हटने के फैसले पर सबकी नजर है। सऊदी अरब और हूतियों के बीच जारी संघर्ष के बीच अमेरिका की आगे की रणनीति को लेकर भी सवाल बने हुए हैं।

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