अमेरिका और कनाडा के बीच बढ़ता व्यापार तनाव फिलहाल कुछ दिनों के लिए थमता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा से आने वाले सामान पर प्रस्तावित 50 फीसदी टैरिफ को तीन दिनों के लिए टाल दिया है। यह शुल्क गुरुवार सुबह से लागू होने वाला था। ट्रंप के मुताबिक, दोनों देशों के बीच एक व्यापार समझौते पर सहमति बन गई है और अब केवल अंतिम दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया बाकी है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट के जरिए टैरिफ टालने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कनाडा पर प्रस्तावित 50 फीसदी शुल्क को तीन दिनों के लिए रोकने का फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि अमेरिका और कनाडा के बीच एक डील बन गई है। हालांकि, समझौते को औपचारिक रूप देने के लिए जरूरी दस्तावेजों को अभी अंतिम रूप दिया जाना बाकी है।
इससे पहले अमेरिका ने जुलाई में कनाडा से आने वाले सामान पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान किया था। यदि यह शुल्क लागू होता तो करीब 20 अरब डॉलर मूल्य के कनाडाई उत्पादों पर भारी आयात शुल्क लग सकता था। इससे रोजमर्रा के सामान के साथ-साथ कई औद्योगिक उत्पाद भी प्रभावित होने की आशंका थी।
नई ट्रेड डील में क्या-क्या शामिल होगा?
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) के अनुसार, प्रस्तावित व्यापार समझौते में अमेरिकी उत्पादों के लिए कनाडाई बाजार में व्यापक पहुंच, आर्थिक सुरक्षा से जुड़े प्रावधान और डिजिटल व्यापार के क्षेत्र में बेहतर तालमेल जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं।
इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार को सुचारू बनाए रखना और अमेरिकी बाजार तथा श्रमिकों के हितों की सुरक्षा करना बताया गया है। हालांकि, जब तक अंतिम दस्तावेज तैयार होकर औपचारिक रूप से लागू नहीं होते, तब तक समझौते की शर्तों को लेकर पूरी तस्वीर साफ नहीं होगी।
ट्रंप और मार्क कार्नी के बीच हुई बातचीत
टैरिफ लागू होने की समयसीमा नजदीक आने के साथ ही अमेरिका और कनाडा के बीच बातचीत तेज हो गई थी। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच पिछले दो दिनों में दो बार फोन पर बातचीत हुई। कनाडाई प्रधानमंत्री ने भी माना कि दोनों देशों के बीच वार्ता बेहद गंभीर और संवेदनशील चरण में पहुंच गई थी।
अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापार संबंध बेहद महत्वपूर्ण हैं। दोनों देशों के बीच करीब 5,525 मील लंबी सीमा है। इस सीमा के पार हर दिन लगभग 3.3 लाख लोग और करीब 2 अरब डॉलर का सामान आवाजाही करता है।
ऐसे में यदि 50 फीसदी टैरिफ लागू होता तो इसका असर दोनों देशों के कारोबार, सप्लाई चेन और उपभोक्ताओं पर पड़ सकता था। फिलहाल तीन दिन की राहत से दोनों देशों को समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या दोनों सरकारें तय समय सीमा के भीतर अंतिम दस्तावेज तैयार कर लेती हैं और प्रस्तावित ट्रेड डील औपचारिक रूप से लागू होती है।

