10 Oct 2026, Sat

ट्रंप का बड़ा यू-टर्न, रूस से डीजल खरीदने की डील, भड़के जेलेंस्की

दुनिया भर में ईंधन की बढ़ती कीमतों और ऊर्जा आपूर्ति में आ रही बाधाओं के बीच एक बड़ा फैसला सामने आया है। रूस से डीजल की आपूर्ति को आसान बनाने के लिए प्रतिबंधों में अस्थायी छूट दी गई है। इस कदम के तहत रूसी डीजल को अमेरिकी और वैश्विक बाजारों में उपलब्ध कराने का रास्ता खुल सकता है। ऊर्जा बाजार में इस फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति प्रभावित हुई है।

इस फैसले की घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत के बाद की। इसके तहत रूस से बड़ी मात्रा में डीजल ईंधन बाजार में लाने की योजना बताई गई है। हालांकि, इस कदम को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

रूसी डीजल की आपूर्ति के लिए अस्थायी छूट

घोषणा के अनुसार, रूस तत्काल तीन लाख टन से अधिक डीजल ईंधन अमेरिकी और वैश्विक बाजारों में उपलब्ध कराने की तैयारी में है। इसके अतिरिक्त, आने वाले महीनों में भी बड़ी मात्रा में ईंधन की आपूर्ति का उल्लेख किया गया है। रूसी प्रशासन ने भी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति करने की तत्परता जताई है।

अमेरिकी वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अस्थायी लाइसेंस के माध्यम से रूसी डीजल की वैश्विक बाजारों में आपूर्ति के लिए अप्रैल 2027 तक छूट देने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य मौजूदा परिस्थितियों में ईंधन की उपलब्धता बढ़ाना और बाजार पर पड़ रहे दबाव को कम करना है।

हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि प्रतिबंधों में अस्थायी छूट का अर्थ सभी प्रतिबंधों को पूरी तरह समाप्त करना नहीं है। इसकी वास्तविक सीमा संबंधित लाइसेंस की शर्तों पर निर्भर करेगी।

ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी बनी बड़ी चुनौती

इस फैसले के पीछे सबसे प्रमुख कारण ऊर्जा बाजार में बढ़ता दबाव माना जा रहा है। अमेरिका में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी के अंत की तुलना में पेट्रोल की औसत कीमत 46 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 4.37 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई। वहीं, डीजल की कीमत में लगभग 67 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बाद यह 6.28 डॉलर प्रति गैलन बताई गई।

ईंधन की महंगाई का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। ट्रक परिवहन, कृषि, माल ढुलाई और खाद्य पदार्थों की आपूर्ति जैसी गतिविधियों की लागत भी इससे प्रभावित होती है। इसी वजह से ऊर्जा की कीमतों को नियंत्रित करना सरकारों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा से बढ़ा संकट

पश्चिम एशिया में जारी सैन्य तनाव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के कारण तेल की आवाजाही और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। इस मार्ग से बड़ी मात्रा में वैश्विक तेल व्यापार होता है, इसलिए यहां किसी भी तरह की बाधा का असर कई देशों पर पड़ सकता है।

अमेरिकी प्रशासन ने ईंधन की कीमतें बढ़ने के लिए कई कारणों का उल्लेख किया है, जिनमें क्षेत्रीय संघर्ष और रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले भी शामिल हैं।

यूक्रेन की प्रतिक्रिया से बढ़ी राजनीतिक बहस

रूसी डीजल की आपूर्ति के लिए छूट देने के फैसले पर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने नाराजगी जताई है। उनका रुख इस बात को लेकर चिंता दर्शाता है कि रूसी ऊर्जा उत्पादों के व्यापार को राहत देने से रूस को आर्थिक लाभ मिल सकता है।

अब इस फैसले का वास्तविक प्रभाव वैश्विक बाजार में ईंधन की उपलब्धता, कीमतों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर निर्भर करेगा। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अतिरिक्त आपूर्ति से महंगाई को कितनी राहत मिलती है और इस कदम का भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर क्या असर पड़ता है।

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