नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद विवाद, मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मामले और संभल के हरि मंदिर-मस्जिद विवाद से जुड़े पक्षों को विशेष लोक अदालत की सुलह प्रक्रिया में शामिल होने के लिए नोटिस जारी किया है। इस पहल का उद्देश्य वर्षों से चल रही कानूनी लड़ाइयों को लंबा खींचने के बजाय आपसी बातचीत और सहमति के माध्यम से समाधान तलाशना है।
सुप्रीम कोर्ट परिसर में 21 से 23 अगस्त तक “समाधान समारोह” नाम से विशेष लोक अदालत आयोजित की जाएगी। इसमें ऐसे विवादों को शामिल किया जाएगा, जिनमें संबंधित पक्ष बातचीत के माध्यम से समझौते की संभावना तलाश सकते हैं। ज्ञानवापी, मथुरा और संभल जैसे धार्मिक रूप से संवेदनशील मामलों से जुड़े हिंदू और मुस्लिम पक्षों को भी इस प्रक्रिया के लिए नोटिस भेजा गया है।
लोक अदालत से पहले मध्यस्थता की प्रक्रिया
विशेष लोक अदालत की कार्यवाही शुरू होने से पहले संबंधित मामलों में सुलह और मध्यस्थता की कोशिशें की जा रही हैं। जानकारी के अनुसार, निचली अदालतों के स्तर पर मध्यस्थता की प्रक्रिया 21 अप्रैल से शुरू हो चुकी है।
ज्ञानवापी मामले में लोक अदालत से पहले 14 जुलाई को वाराणसी में सुलह-पूर्व सुनवाई प्रस्तावित है। इस सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों से बातचीत कर यह जानने की कोशिश की जाएगी कि क्या विवाद के किसी हिस्से को आपसी सहमति से सुलझाया जा सकता है।
मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मामले में भी पहले मध्यस्थता की कोशिश की गई थी। खबरों के अनुसार, 5 जुलाई को हुई बातचीत में कोई सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद इस विवाद को सुप्रीम कोर्ट की विशेष लोक अदालत पहल में शामिल किया गया।
क्या है ज्ञानवापी मस्जिद विवाद?
ज्ञानवापी विवाद में हिंदू याचिकाकर्ताओं का दावा है कि वाराणसी स्थित मस्जिद का निर्माण मुगल काल में प्राचीन काशी विश्वनाथ मंदिर के हिस्से को ध्वस्त करने के बाद किया गया था। विभिन्न याचिकाओं में मस्जिद परिसर के कुछ स्थानों पर पूजा करने का अधिकार मांगा गया है।
मुस्लिम पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाली अंजुमन इंतजामिया मस्जिद समिति इन दावों का विरोध करती रही है। समिति का कहना है कि मस्जिद पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 के तहत संरक्षित है। यह कानून धार्मिक स्थलों के उस स्वरूप को बनाए रखने की बात करता है, जो 15 अगस्त 1947 को अस्तित्व में था।
ज्ञानवापी से जुड़े मामलों में सर्वेक्षण, पूजा के अधिकार और याचिकाओं की सुनवाई योग्य होने जैसे मुद्दे विभिन्न अदालतों में लंबित हैं।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद
मथुरा का विवाद श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर और उसके पास स्थित शाही ईदगाह मस्जिद से संबंधित है। हिंदू पक्ष का दावा है कि मस्जिद का निर्माण भगवान कृष्ण के जन्मस्थान पर बने मंदिर को तोड़कर किया गया था।
कई याचिकाओं में विवादित भूमि को श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर को सौंपने और मस्जिद को हटाने की मांग की गई है। वहीं शाही ईदगाह मस्जिद समिति ने इन दावों को चुनौती देते हुए कहा है कि मुकदमे कानूनी रूप से सुनवाई योग्य नहीं हैं।
संभल विवाद पर भी नोटिस
संभल के हरि मंदिर-मस्जिद विवाद से जुड़े पक्षों को भी विशेष लोक अदालत की प्रक्रिया में शामिल किया गया है। सुप्रीम कोर्ट की इस पहल को धार्मिक विवादों में संवाद और शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। हालांकि, किसी भी समझौते के लिए दोनों पक्षों की सहमति आवश्यक होगी।

