मुंबई: बॉलीवुड फिल्ममेकर Zoya Akhtar और Reema Kagti के प्रोडक्शन हाउस टाइगर बेबी डिजिटल एलएलपी से बड़ी मात्रा में गोपनीय डिजिटल डेटा चोरी होने का मामला सामने आया है। प्रोडक्शन कंपनी के बांद्रा स्थित कार्यालय से 66 हार्ड डिस्क गायब होने के बाद फिल्म इंडस्ट्री में हड़कंप मच गया है। इन हार्ड डिस्क में फिल्मों, वेब सीरीज, विज्ञापनों और अन्य महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स से जुड़ा संवेदनशील डेटा संग्रहित था। मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है और चोरी के पीछे किसी बड़े नेटवर्क की आशंका से भी जांच की जा रही है।
जानकारी के अनुसार, घटना का खुलासा 21 मई 2026 को हुआ, जब कंपनी के कर्मचारियों को एक प्रोजेक्ट के लिए कुछ हार्ड डिस्क की आवश्यकता पड़ी। काफी तलाश के बावजूद हार्ड डिस्क नहीं मिलने पर स्टाफ ने स्टोरेज कैबिनेट की जांच की। जांच के दौरान कई खाली और आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त बॉक्स मिले, जिससे संदेह गहराया। शुरुआती स्तर पर तकनीकी गड़बड़ी या रिकॉर्ड प्रबंधन की समस्या की आशंका जताई गई, लेकिन बाद में यह स्पष्ट हो गया कि मामला चोरी का है।
इसके बाद कंपनी की एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट और एचआर एडमिन मेहजबीन मुश्ताक शेख ने बांद्रा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की और दो संदिग्धों की पहचान की। गिरफ्तार आरोपियों में मोहम्मद शाहिद अजीम खान और रितेश नामक व्यक्ति शामिल हैं।
पुलिस पूछताछ में मोहम्मद शाहिद अजीम खान ने कई अहम खुलासे किए हैं। उसने स्वीकार किया कि पिछले पांच महीनों के दौरान उसने कंपनी के कार्यालय से 24 हार्ड डिस्क चोरी कर बेची थीं। आरोपी के अनुसार, उसने ये डिस्क बोरीवली निवासी रितेश को 15,000 से 20,000 रुपये प्रति डिस्क के हिसाब से बेचीं। हालांकि बाकी गायब हार्ड डिस्क के संबंध में उसने स्पष्ट जानकारी नहीं दी है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि शेष डिस्क कहां हैं और उनमें मौजूद डेटा का कहीं दुरुपयोग तो नहीं हुआ।
जांच में सामने आया है कि कंपनी के पास कुल 119 हार्ड डिस्क थीं, जिनमें से 66 फिलहाल गायब हैं। इन हार्ड डिस्क की स्टोरेज क्षमता 16TB से लेकर 72TB तक थी। इनमें फिल्मों की रॉ फुटेज, पोस्ट-प्रोडक्शन फाइल्स, एडिटेड कंटेंट, शूटिंग आर्काइव और विज्ञापन परियोजनाओं से जुड़ा महत्वपूर्ण डेटा मौजूद था।
सूत्रों के अनुसार, चोरी हुई डिस्क में कई चर्चित प्रोजेक्ट्स का डेटा भी शामिल था। इनमें Made in Heaven, Ghost Stories, “नायका” और “गांधी मनी” जैसे प्रोजेक्ट्स से संबंधित सामग्री होने की आशंका है। कुछ हार्ड डिस्क में अप्रकाशित और अत्यंत संवेदनशील कंटेंट भी मौजूद था, जिससे डेटा लीक होने का खतरा बढ़ गया है।
पुलिस को कंपनी के एक अन्य कर्मचारी कल्पेश पवार की भूमिका पर भी संदेह है। हालांकि उसकी संलिप्तता की अभी पुष्टि नहीं हुई है और जांच जारी है। अधिकारियों का मानना है कि यह केवल साधारण चोरी का मामला नहीं हो सकता, बल्कि इसके पीछे संगठित डेटा चोरी गिरोह भी सक्रिय हो सकता है।
इस घटना ने मनोरंजन उद्योग में डिजिटल सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आज के दौर में फिल्मों और वेब सीरीज का अधिकांश निर्माण, संपादन और संग्रहण डिजिटल माध्यमों पर निर्भर है। ऐसे में संवेदनशील डेटा की चोरी न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचा सकती है, बल्कि किसी प्रोजेक्ट की रिलीज, गोपनीयता और व्यावसायिक रणनीति को भी प्रभावित कर सकती है।
फिलहाल दोनों गिरफ्तार आरोपियों को अदालत ने 29 मई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। बांद्रा पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है और चोरी हुए डेटा की बरामदगी के साथ-साथ संभावित डेटा लीक की आशंकाओं की भी पड़ताल कर रही है।

