9 Jun 2026, Tue

जाह्नवी कपूर के पेड्डी सीन्स को क्या बोल गईं आशिकी की हीरोइन, बोलीं- ‘हमेशा से रहा है यही ट्रेंड’

मुंबई: अभिनेत्री जाह्नवी कपूर की हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘पेड्डी’ बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है। फिल्म ने रिलीज के पहले दिन ही 100 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई कर सभी को चौंका दिया था। वहीं कुछ ही दिनों में इसका कुल कलेक्शन 200 करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है। हालांकि, फिल्म की सफलता के बीच इसमें महिलाओं के चित्रण को लेकर विवाद भी लगातार बढ़ता जा रहा है। अब इस बहस में 90 के दशक की चर्चित अभिनेत्री और फिल्म ‘आशिकी’ से पहचान बनाने वाली अनु अग्रवाल भी शामिल हो गई हैं।

फिल्म में जाह्नवी कपूर के कुछ दृश्यों को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार आलोचना हो रही है। कई दर्शकों और फिल्म समीक्षकों का आरोप है कि महिला किरदारों को अनावश्यक रूप से ग्लैमर और आकर्षण के माध्यम से पेश किया गया है। विवाद बढ़ने के बाद फिल्म के निर्देशक को भी सार्वजनिक रूप से सफाई देनी पड़ी थी और उन्होंने दर्शकों की भावनाओं का सम्मान करते हुए खेद व्यक्त किया था।

अब इस पूरे मुद्दे पर अनु अग्रवाल ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी राय रखी है। उन्होंने एक पुरानी तस्वीर साझा करते हुए महिलाओं के फिल्मी चित्रण पर गंभीर सवाल उठाए। अनु ने कहा कि महिलाओं को वस्तु की तरह प्रस्तुत करना फिल्म इंडस्ट्री में कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह दशकों से चली आ रही प्रवृत्ति है।

अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा कि आज के दर्शकों की जागरूकता सराहनीय है, जो फिल्मों में महिलाओं के सम्मानजनक और गरिमापूर्ण चित्रण की मांग कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बदलाव की जिम्मेदारी केवल दर्शकों या फिल्म निर्माताओं की नहीं है, बल्कि कलाकारों की भी उतनी ही बड़ी भूमिका होती है।

अनु अग्रवाल ने लिखा, “पेड्डी को लेकर चल रही चर्चा ने मुझे अपने करियर के शुरुआती दिनों की याद दिला दी। मैं आज के दर्शकों की सराहना करती हूं कि वे खुलकर अपनी बात रख रहे हैं और महिलाओं के बेहतर प्रतिनिधित्व की मांग कर रहे हैं। लेकिन इसकी जिम्मेदारी केवल दर्शकों या निर्देशकों की नहीं है। हम कलाकारों को भी अपनी भूमिका समझनी होगी।”

उन्होंने बताया कि फिल्म ‘आशिकी’ की सफलता के बाद उन्होंने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया था। किसी भी फिल्म को साइन करने से पहले वह पूरी कहानी सुनती थीं और यह सुनिश्चित करती थीं कि उनके किरदार को सम्मानजनक तरीके से प्रस्तुत किया जाए।

अनु ने आगे कहा, “उस दौर में महिलाओं का वस्तुकरण बहुत सामान्य बात थी। मैंने उस प्रवृत्ति के खिलाफ खड़े होने का फैसला किया और केवल वही फिल्में चुनीं जिनमें महिला पात्रों को सार्थक रूप से दिखाया गया हो। कई मायनों में यही वजह रही कि बाद में मैंने फिल्मों से दूरी बना ली।”

अनु अग्रवाल के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर नई बहस शुरू हो गई है। कई लोगों ने उनके विचारों का समर्थन किया है और फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं की बेहतर प्रस्तुति की मांग दोहराई है। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि समय के साथ सिनेमा में काफी बदलाव आया है और अब पहले की तुलना में महिला किरदार अधिक मजबूत और प्रभावशाली रूप में सामने आ रहे हैं।

फिलहाल, ‘पेड्डी’ बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है, लेकिन इसके साथ जुड़ा यह विवाद आने वाले दिनों में फिल्म और उसके निर्माताओं के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *