16 Apr 2026, Thu

जापान के ‘AZEC Plus’ में जयशंकर की दो टूक, कहा-व्यापारिक जहाजों पर हमले हैं अस्वीकार्य

टोक्यो में आयोजित ‘AZEC Plus’ सम्मेलन के दौरान भारत ने वैश्विक ऊर्जा संकट और समुद्री सुरक्षा को लेकर अपनी गंभीर चिंता जाहिर की है। एस जयशंकर ने इस मंच से स्पष्ट संदेश दिया कि दुनिया भर में व्यापारिक जहाजों पर हो रहे हमले पूरी तरह अस्वीकार्य हैं और इन्हें तुरंत रोका जाना चाहिए।

यह बयान ऐसे समय आया है जब इजरायलअमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव और संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हो रही है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बाधित होने से स्थिति और गंभीर हो गई है।

सप्लाई चेन बाधित, बढ़ी चिंता

‘AZEC Plus’ बैठक में बोलते हुए जयशंकर ने कहा कि ऊर्जा बाजारों में सप्लाई चेन की रुकावट वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सुरक्षित और निर्बाध समुद्री मार्ग अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बेहद जरूरी हैं।

उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (Twitter) पर भी इस बैठक की जानकारी साझा करते हुए लिखा कि भारत सुरक्षित समुद्री नौवहन के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है और इस दिशा में साझेदार देशों के साथ मिलकर काम करेगा।

व्यापारिक जहाजों पर हमले ‘अस्वीकार्य’

विदेश मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि व्यापारी जहाजों पर हमले किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किए जा सकते। उनका कहना था कि इस तरह की घटनाएं न केवल ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित करती हैं, बल्कि वैश्विक व्यापार और आर्थिक विकास पर भी नकारात्मक असर डालती हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि एक प्रमुख ऊर्जा उपभोक्ता होने के नाते भारत की जिम्मेदारी है कि वह आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने में सक्रिय भूमिका निभाए।

होर्मुज में संकट, दुनिया पर असर

पिछले डेढ़ महीने से होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बाधित है, जिससे तेल और गैस की सप्लाई पर भारी असर पड़ा है। यह मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा ट्रांजिट पॉइंट्स में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है।

इस संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। इसके साथ ही माल ढुलाई की लागत भी बढ़ गई है, जिसका असर आम लोगों तक पहुंच रहा है। खाने-पीने की चीजों से लेकर रोजमर्रा के सामान तक महंगे हो रहे हैं।

भारत की रणनीति और आगे की राह

भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इस संकट को लेकर सतर्क है। जयशंकर ने कहा कि भारत समान विचारधारा वाले देशों के साथ मिलकर सप्लाई चेन को मजबूत बनाने और वैकल्पिक रास्तों पर काम करेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात अगर लंबे समय तक बने रहते हैं, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा पड़ सकता है। ऐसे में भारत जैसे बड़े उपभोक्ता देशों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, ‘AZEC Plus’ सम्मेलन में भारत का यह स्पष्ट रुख वैश्विक मंच पर उसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और सप्लाई चेन की मजबूती जैसे मुद्दों पर भारत अब सक्रिय कूटनीतिक भूमिका निभा रहा है, जो आने वाले समय में वैश्विक संतुलन तय करने में अहम साबित हो सकती है।

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