23 May 2026, Sat

चीन की कोयला खदान में जोरदार विस्फोट, 8 की मौत, 38 मजदूर फंसे

 

बीजिंग: चीन के उत्तरी प्रांत शानशी में एक कोयला खदान में हुए भीषण विस्फोट ने बड़ा हादसा खड़ा कर दिया है। इस दुर्घटना में अब तक 8 मजदूरों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 38 मजदूर अभी भी खदान के भीतर फंसे हुए हैं। हादसे के समय खदान में कुल 247 मजदूर काम कर रहे थे, जिनमें से 201 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। राहत और बचाव कार्य तेजी से जारी है।

जानकारी के अनुसार यह हादसा शुक्रवार शाम को चांगझी शहर की लियुशेन्यू कोयला खदान में हुआ। विस्फोट के बाद खदान के अंदर अफरा-तफरी मच गई और कई मजदूर अंदर ही फंस गए। स्थानीय प्रशासन और आपातकालीन टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और बचाव अभियान शुरू किया गया।

सरकारी समाचार एजेंसी Xinhua News Agency के मुताबिक, खदान में विस्फोट के कारणों का अभी तक स्पष्ट पता नहीं चल सका है। प्रारंभिक जानकारी में बताया गया है कि सुरक्षा मानकों की जांच और तकनीकी खामियों की संभावनाओं पर भी जांच की जा रही है। प्रशासन ने पूरे क्षेत्र को घेरकर राहत कार्य तेज कर दिया है ताकि फंसे हुए मजदूरों को जल्द से जल्द बाहर निकाला जा सके।

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है और राहत कार्यों में तेजी लाने के सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा है कि बचाव अभियान में किसी भी प्रकार की देरी न हो और सभी संसाधनों का पूरी तरह उपयोग किया जाए। साथ ही उन्होंने घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश भी दिए हैं और दोषियों की जिम्मेदारी तय करने पर जोर दिया है।

शानशी प्रांत चीन का प्रमुख कोयला उत्पादन क्षेत्र माना जाता है। यह क्षेत्र देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बड़े पैमाने पर कोयला खनन के चलते यहां इस तरह की दुर्घटनाओं का जोखिम भी बना रहता है। विशेषज्ञों के अनुसार, खनन सुरक्षा मानकों के सख्त पालन और आधुनिक तकनीक के उपयोग से ऐसे हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है।

फिलहाल बचाव दल लगातार खदान के अंदर फंसे मजदूरों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। ऑक्सीजन सप्लाई, मलबा हटाने और सुरक्षित मार्ग बनाने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। प्रशासन का कहना है कि अगले कुछ घंटों में स्थिति पर और स्पष्ट जानकारी मिल सकती है।

यह हादसा एक बार फिर चीन की कोयला खनन सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है और इस बात को उजागर करता है कि ऊर्जा उत्पादन के इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में सुरक्षा कितनी अहम है।

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