15 Jun 2026, Mon

कोलन कैंसर होने पर दिखते हैं कौन से लक्षण? डॉक्टर से जानें शुरुआत में ही कैसे लगाएं इसका पता?

नई दिल्ली: बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान और बढ़ते तनाव के बीच कोलन कैंसर (बड़ी आंत का कैंसर) के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह एक गंभीर बीमारी है, लेकिन यदि इसकी पहचान शुरुआती चरण में हो जाए तो इलाज की सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है। यही वजह है कि डॉक्टर लोगों को इसके शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करने की सलाह दे रहे हैं।

नई दिल्ली स्थित H.O.P.E. (Holistic Oncology with Patient Empathy) ऑन्कोलॉजी क्लिनिक के को-फाउंडर और डायरेक्टर डॉ. अमिश वोरा के अनुसार, कोलन कैंसर बड़ी आंत के अंदर बनने वाली असामान्य कोशिकाओं से शुरू होता है। शुरुआत में ये कोशिकाएं छोटे पॉलीप्स के रूप में विकसित होती हैं, जो समय के साथ कैंसर का रूप ले सकती हैं। कई बार शुरुआती अवस्था में इस बीमारी के कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, जिससे मरीज को बीमारी का पता देर से चलता है।

डॉक्टरों का कहना है कि पेट दर्द, लगातार कब्ज, कमजोरी, अचानक वजन कम होना और मल में खून आना जैसे लक्षण कोलन कैंसर की ओर संकेत कर सकते हैं। हालांकि, लोग अक्सर इन्हें सामान्य पेट संबंधी समस्याएं समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। यही लापरवाही आगे चलकर गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक कब्ज की समस्या बनी रहती है, पेट में लगातार दर्द, सूजन या मरोड़ महसूस होती है या मल के साथ बार-बार खून आता है, तो उसे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय रहते जांच कराने से बीमारी का पता जल्दी लगाया जा सकता है और इलाज भी अधिक प्रभावी साबित होता है।

कोलन कैंसर के पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। इनमें खराब खानपान, मोटापा, शारीरिक गतिविधियों की कमी, बढ़ती उम्र, धूम्रपान, अत्यधिक शराब का सेवन और पारिवारिक इतिहास प्रमुख हैं। इसके अलावा आंतों में लंबे समय तक रहने वाली सूजन भी इस बीमारी के खतरे को बढ़ा सकती है।

आज के समय में मेडिकल साइंस ने कोलन कैंसर की पहचान के लिए कई आधुनिक तकनीकें विकसित की हैं। कोलोनोस्कोपी को इस बीमारी की जांच का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है। इसके अलावा खून और मल की जांच के जरिए भी शुरुआती संकेतों का पता लगाया जा सकता है। आधुनिक उपकरणों और तकनीकों की मदद से डॉक्टर अब पहले की तुलना में अधिक सटीक तरीके से बीमारी की पहचान कर पा रहे हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता और नियमित जांच इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। संतुलित आहार, फाइबर युक्त भोजन, ताजे फल और हरी सब्जियों का सेवन बड़ी आंत को स्वस्थ रखने में मदद करता है। साथ ही नियमित व्यायाम, पर्याप्त पानी पीना और धूम्रपान-शराब से दूरी बनाना भी जरूरी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि लोग अपने शरीर में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों पर ध्यान दें और समय पर जांच कराएं, तो कोलन कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का समय रहते पता लगाया जा सकता है। शुरुआती पहचान न केवल इलाज को आसान बनाती है, बल्कि मरीज को सामान्य और स्वस्थ जीवन जीने का बेहतर अवसर भी देती है।

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