चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अमेरिका पहुंच गए हैं। वॉशिंगटन में उनके दौरे को दोनों देशों के रिश्तों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। अमेरिका पहुंचने के बाद शी जिनपिंग ने चीन और अमेरिका के संबंधों को लेकर बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे का प्रतिद्वंद्वी बनने के बजाय साझेदार के रूप में आगे बढ़ना चाहिए। उनके इस बयान के बीच दोनों देशों के बीच व्यापार, तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ताइवान और सैन्य संबंधों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर बातचीत होने की उम्मीद है।
ट्रंप ने एयरपोर्ट पर किया शी जिनपिंग का स्वागत
शी जिनपिंग अपनी पत्नी पेंग लियुआन के साथ अमेरिका पहुंचे। ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप ने उनका स्वागत किया। यह स्वागत इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति का किसी विदेशी नेता के लिए इस तरह एयरपोर्ट पर व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहना लंबे समय बाद देखने को मिला। स्वागत समारोह में दोनों देशों के झंडे और अमेरिकी वायुसेना के बैंड की मौजूदगी भी रही।
शी जिनपिंग का यह दौरा एक दशक से अधिक समय बाद वॉशिंगटन की उनकी पहली यात्रा है। दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्ष इस साल पहले भी मुलाकात कर चुके हैं और अब वॉशिंगटन में होने वाली बातचीत को रिश्तों को स्थिर रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
शी जिनपिंग बोले- साझेदारी के रास्ते पर आगे बढ़ें
अमेरिका पहुंचने के बाद अपने लिखित संबोधन में शी जिनपिंग ने कहा कि चीन और अमेरिका को प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि साझेदार होना चाहिए। उन्होंने दोनों देशों के लोगों के बीच लंबे समय से चले आ रहे संपर्क और आपस में जुड़े हितों का भी उल्लेख किया।
शी ने कहा कि चीन के राष्ट्रीय विकास और अमेरिका को फिर से मजबूत बनाने के लक्ष्य एक-दूसरे के साथ आगे बढ़ सकते हैं। उनके मुताबिक, दोनों देश एक-दूसरे की सफलता में योगदान दे सकते हैं और इससे दुनिया को भी फायदा हो सकता है।
व्यापार और टैरिफ पर रहेगी खास नजर
शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप की बातचीत में व्यापार और टैरिफ सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल रहेंगे। दोनों देशों के बीच व्यापार तनाव को कम करने के लिए पहले से चली आ रही अस्थायी व्यवस्था को आगे बढ़ाने पर भी सहमति बनी है। ऐसे में इस बैठक में दोनों पक्ष व्यापारिक संबंधों को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा कर सकते हैं।
AI और टेक्नोलॉजी पर भी होगी चर्चा
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अत्याधुनिक तकनीक भी बातचीत के प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं। दोनों देश AI के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन तकनीकी प्रतिस्पर्धा के साथ कई प्रतिबंध और सुरक्षा से जुड़े सवाल भी सामने आए हैं। ऐसे में इस मुद्दे पर दोनों नेताओं की बातचीत पर दुनिया की नजर रहेगी।
ताइवान और सैन्य संबंध भी अहम मुद्दे
बातचीत में ताइवान का मुद्दा भी महत्वपूर्ण रहने की उम्मीद है। इसके अलावा सैन्य संबंध, क्षेत्रीय सुरक्षा, ईरान और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी दोनों पक्षों के बीच चर्चा हो सकती है। ऐसे में शी जिनपिंग का यह दौरा केवल द्विपक्षीय रिश्तों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर व्यापक अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी पड़ सकता है।

