आईसीसी विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के नए मुकाबले एक बार फिर शुरू होने जा रहे हैं। मई में पाकिस्तान क्रिकेट टीम बांग्लादेश दौरे पर जाएगी, जहां दो टेस्ट मैच खेले जाएंगे। इस बीच WTC के इतिहास से जुड़ा एक दिलचस्प आंकड़ा सामने आया है—अब तक इस टूर्नामेंट में सिर्फ दो ही बल्लेबाज तिहरा शतक जड़ पाए हैं। हालांकि कई खिलाड़ी इस मुकाम के करीब पहुंचे, लेकिन इतिहास रचने से चूक गए।
अगर WTC के सबसे बड़े स्कोर की बात करें, तो यह रिकॉर्ड डेविड वार्नर के नाम दर्ज है। उन्होंने साल 2019 में पाकिस्तान के खिलाफ एडिलेड में नाबाद 335 रन की ऐतिहासिक पारी खेली थी। वार्नर ने 418 गेंदों का सामना करते हुए 39 चौके और एक छक्का लगाया। खास बात यह रही कि वह पूरी पारी में आउट नहीं हुए। उनका यह रिकॉर्ड आज भी अटूट है और WTC के इतिहास का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर बना हुआ है।
इस सूची में दूसरे नंबर पर हैं हैरी ब्रूक, जिन्होंने साल 2024 में पाकिस्तान के खिलाफ ही मुल्तान में 317 रन बनाए थे। ब्रूक ने 418 गेंदों में 29 चौके और 3 छक्के लगाए। उनकी यह पारी भी बेहद खास रही और इसी के साथ वह WTC में तिहरा शतक लगाने वाले दूसरे बल्लेबाज बन गए। अब तक सिर्फ वार्नर और ब्रूक ही इस टूर्नामेंट में 300 का आंकड़ा पार कर सके हैं।
तीसरे स्थान पर भारतीय युवा बल्लेबाज शुभमन गिल का नाम आता है, जो तिहरे शतक से बेहद करीब पहुंचकर भी चूक गए। गिल ने साल 2025 में इंग्लैंड के खिलाफ 269 रन की शानदार पारी खेली थी। उन्होंने 387 गेंदों का सामना किया और 30 चौकों के साथ 3 छक्के लगाए। उनकी यह पारी दर्शाती है कि वह भविष्य में इस रिकॉर्ड को तोड़ने की क्षमता रखते हैं।
चौथे नंबर पर इंग्लैंड के ही जैक क्रॉले हैं, जिन्होंने 2020 में पाकिस्तान के खिलाफ 267 रन बनाए थे। क्रॉले ने 393 गेंदों में 34 चौके और एक छक्का जड़ा। उनकी यह पारी भी WTC के इतिहास की सबसे यादगार पारियों में गिनी जाती है।
इन आंकड़ों से साफ है कि WTC में बड़े स्कोर बनाना आसान नहीं है। टेस्ट क्रिकेट की कठिन परिस्थितियों में लंबे समय तक टिककर खेलना हर बल्लेबाज के बस की बात नहीं होती। यही वजह है कि अब तक केवल दो ही तिहरे शतक देखने को मिले हैं।
आने वाले मुकाबलों में जब पाकिस्तान और बांग्लादेश आमने-सामने होंगे, तब फैंस की नजरें इस बात पर भी होंगी कि क्या कोई बल्लेबाज इन रिकॉर्ड्स को चुनौती दे पाता है या नहीं। खासकर युवा खिलाड़ियों से उम्मीदें ज्यादा हैं, जो आक्रामक खेल के साथ-साथ लंबी पारियां खेलने की क्षमता रखते हैं।
कुल मिलाकर, विश्व टेस्ट चैंपियनशिप का इतिहास भले ही अभी छोटा हो, लेकिन इसमें बनी बड़ी पारियां इसे और रोमांचक बनाती हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कोई खिलाड़ी वार्नर और ब्रूक के तिहरे शतक के क्लब में शामिल हो पाता है या नहीं।

