24 Jun 2026, Wed

Video: भारत से कितना अलग है अमेरिका के ऑफिस का वर्क कल्चर? भारतीय शख्स के दावों पर यूजर्स ने किया रिएक्ट

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक भारतीय मूल के शख्स का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उसने भारत और अमेरिका के वर्क कल्चर के बीच अंतर को लेकर अपने अनुभव साझा किए हैं। वीडियो में शख्स ने दावा किया कि अमेरिका में कर्मचारियों के निजी जीवन और काम के बीच संतुलन को अधिक महत्व दिया जाता है, जबकि भारत में लंबे समय तक ऑफिस में रुकने की संस्कृति अभी भी काफी प्रचलित है।

यह वीडियो इंस्टाग्राम पर @desidad_in_america नामक अकाउंट से साझा किया गया है। वीडियो के साथ लिखा गया है, “भारत बनाम अमेरिका: वर्क-लाइफ बैलेंस”। पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर इस विषय को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।

भारत में काम करने का अनुभव किया साझा

वीडियो में नितिन मल्होत्रा नामक शख्स बताते हैं कि उन्होंने भारत में लगभग पांच वर्षों तक काम किया और अब पिछले 15 वर्षों से अमेरिका में रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत में नौकरी के दौरान उन्हें अक्सर एक अलग तरह के कार्य वातावरण का सामना करना पड़ा।

नितिन के अनुसार, जब वह अपनी निर्धारित आठ घंटे की ड्यूटी पूरी करके समय पर ऑफिस से निकलते थे, तो कई सहकर्मी और अन्य कर्मचारी उन्हें हैरानी भरी नजरों से देखते थे।

उन्होंने कहा, “अगर मैं सुबह 10 बजे ऑफिस आता और शाम 6 या 6:30 बजे निकलता, तो लोग मुझे ऐसे देखते थे जैसे मैं बहुत जल्दी जा रहा हूं। ऐसा लगता था कि लोग सोचते थे कि आखिर मैं इतनी जल्दी क्यों जा रहा हूं।”

उनका कहना है कि कई कार्यस्थलों पर कर्मचारियों से निर्धारित समय से अधिक देर तक रुकने की अप्रत्यक्ष अपेक्षा की जाती है।

अमेरिका में मिला अलग अनुभव

नितिन ने अमेरिका में अपने कार्य अनुभव को भारत से बिल्कुल अलग बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका में कर्मचारियों के काम के घंटे स्पष्ट रूप से निर्धारित होते हैं और अधिकांश लोग अपनी शिफ्ट पूरी होते ही घर चले जाते हैं।

उन्होंने कहा, “मैं यहां आठ घंटे काम करता हूं और उसके बाद सीधे घर चला जाता हूं। मेरे सहकर्मियों या मैनेजर को इससे कोई समस्या नहीं होती।”

नितिन ने एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि एक बार उनके मैनेजर ने काम के बाद उनसे संपर्क किया था। उन्होंने अगले दिन फोन का जवाब दिया, जिसके लिए मैनेजर ने उनकी सराहना की और अतिरिक्त काम के लिए उन्हें अतिरिक्त भुगतान भी दिया।

ओवरटाइम के लिए मिलता है अतिरिक्त भुगतान

वीडियो में नितिन ने बताया कि अमेरिका में 40 घंटे से अधिक काम करने पर कर्मचारियों को अतिरिक्त भुगतान दिया जाता है। कई मामलों में यह भुगतान सामान्य वेतन की तुलना में डेढ़ गुना तक होता है।

हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि भारत में भी कई कंपनियों में ओवरटाइम और कर्मचारी कल्याण से जुड़ी व्यवस्थाएं मौजूद हैं। लेकिन उनका मानना है कि अमेरिका में वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर जागरूकता और अनुपालन अधिक मजबूत है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका में मैनेजर आमतौर पर कर्मचारियों को काम के बाद अनावश्यक रूप से परेशान नहीं करते और कार्य समय को लेकर स्पष्ट सीमाएं तय होती हैं।

सोशल मीडिया पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने इस पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं दी हैं। कई लोगों ने नितिन के विचारों का समर्थन करते हुए कहा कि भारत में भी कार्य और निजी जीवन के बीच बेहतर संतुलन की आवश्यकता है।

एक यूजर ने लिखा, “भारत को वर्क-लाइफ बैलेंस के मामले में अभी काफी सुधार करने की जरूरत है।”

दूसरे यूजर ने टिप्पणी की, “काम आपकी पूरी जिंदगी नहीं होना चाहिए। व्यक्तिगत जीवन भी उतना ही महत्वपूर्ण है।”

वहीं, कुछ लोगों का कहना था कि भारत में भी कई आधुनिक कंपनियां कर्मचारियों के कल्याण और संतुलित कार्य संस्कृति को बढ़ावा दे रही हैं।

बदल रहा है भारतीय कॉर्पोरेट माहौल

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में भी पिछले कुछ वर्षों में वर्क कल्चर तेजी से बदल रहा है। विशेष रूप से आईटी, स्टार्टअप और बहुराष्ट्रीय कंपनियों में लचीले कार्य घंटे, हाइब्रिड वर्क मॉडल और कर्मचारी कल्याण पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है।

फिलहाल, भारत और अमेरिका के वर्क कल्चर की तुलना करता यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है और कार्यस्थल पर संतुलित जीवनशैली को लेकर नई बहस को जन्म दे रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *