वॉशिंगटन/जेनेवा: लंबे समय से तनावपूर्ण संबंधों के बाद अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर बड़ी प्रगति सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों देशों के बीच प्रस्तावित समझौते के अधिकांश बिंदुओं पर सहमति बन चुकी है और 19 जून 2026 को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में इस समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है तो मध्य पूर्व की राजनीति, वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच हुई बातचीत में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनी है। इनमें ईरान पर लगाए गए आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंधों में राहत, खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों में कमी तथा समुद्री मार्गों की सुरक्षा से जुड़े विषय शामिल हैं। हालांकि समझौते के सभी प्रावधानों को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रस्तावित समझौते के तहत अमेरिका ईरान के खिलाफ लागू कुछ समुद्री प्रतिबंधों और नौसैनिक नाकेबंदी को हटाने पर विचार कर सकता है। इसके बदले में ईरान रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही को पूरी तरह बहाल करने का आश्वासन दे सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग माना जाता है और यहां स्थिरता आने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार को राहत मिल सकती है।
हाल के घटनाक्रमों में यह भी सामने आया है कि ईरानी तेल से भरे कई टैंकर होर्मुज क्षेत्र से सफलतापूर्वक बाहर निकले हैं। टैंकर ट्रैकिंग रिपोर्टों के अनुसार दो सुपरटैंकर लगभग 3.8 मिलियन बैरल कच्चा तेल लेकर रवाना हुए हैं, जबकि एक अन्य टैंकर भी बड़ी मात्रा में तेल निर्यात के लिए क्षेत्र से निकला है। इसे क्षेत्र में तनाव कम होने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि शांति प्रक्रिया के बीच कुछ चुनौतियां भी सामने आई हैं। लेबनान में हाल ही में हुए इजरायली ड्रोन हमलों ने क्षेत्रीय तनाव को फिर बढ़ा दिया है। रिपोर्टों के अनुसार इन हमलों में कई लोगों की मौत हुई है। ऐसे घटनाक्रमों ने इस बात को लेकर चिंता बढ़ा दी है कि कहीं क्षेत्रीय संघर्ष प्रस्तावित अमेरिका-ईरान समझौते को प्रभावित न कर दें।
इस बीच फ्रांस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन में शामिल देशों ने अमेरिका और ईरान के बीच जारी वार्ता का स्वागत किया है। वैश्विक नेताओं का मानना है कि यदि यह समझौता सफल रहता है तो मध्य पूर्व में स्थिरता बढ़ेगी और वैश्विक आर्थिक गतिविधियों को भी लाभ मिलेगा। कई देशों ने दोनों पक्षों से बातचीत और कूटनीतिक समाधान को आगे बढ़ाने की अपील की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समझौते के तहत अमेरिकी सैनिकों की चरणबद्ध वापसी और प्रतिबंधों में राहत जैसे कदम लागू होते हैं, तो यह दोनों देशों के संबंधों में ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय और आधिकारिक घोषणाओं का इंतजार अभी बाकी है।
अब दुनिया की नजर 19 जून को जेनेवा में होने वाली संभावित हस्ताक्षर प्रक्रिया पर टिकी है। यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है, तो यह पिछले कई दशकों में अमेरिका और ईरान के बीच सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धियों में से एक माना जाएगा।

