तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अभिनेता से नेता बने जोसेफ विजय ने विधानसभा चुनावों में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के बाद ऐसा कदम उठाया है, जिसकी पूरे देश में चर्चा हो रही है। तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के प्रमुख विजय ने मुख्यमंत्री बनने से पहले मिलने वाली सरकारी सुविधाओं और सुरक्षा काफिले को लेने से इनकार कर दिया है। उनके इस फैसले को सादगी और राजनीतिक संदेश दोनों के रूप में देखा जा रहा है।
हाल ही में संपन्न हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में विजय की पार्टी TVK ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 108 सीटों पर जीत हासिल की। यह जीत इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि पार्टी ने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा और राज्य की सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) को कड़ी टक्कर देते हुए सत्ता के करीब पहुंच गई। चुनाव परिणाम आने के बाद प्रशासन की ओर से विजय को मुख्यमंत्री स्तर की सुरक्षा और आधिकारिक काफिला उपलब्ध कराया गया था, लेकिन विजय ने उसे स्वीकार करने से मना कर दिया।
पार्टी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि विजय ने साफ कहा है कि जब तक वह औपचारिक रूप से सरकार नहीं बना लेते और मुख्यमंत्री पद की शपथ नहीं ले लेते, तब तक वह मुख्यमंत्री स्तर की सुविधाएं नहीं लेंगे। विजय के निर्देश पर उनके आवास पर भेजे गए चार आधिकारिक वाहन वापस लौटा दिए गए। यह फैसला उनके समर्थकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
जानकारी के मुताबिक, 6 मई को जब विजय सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मिलने पहुंचे, तब भी उन्होंने सरकारी वाहन का इस्तेमाल नहीं किया। वह निजी वाहन से ही राजभवन पहुंचे। हालांकि सुरक्षा व्यवस्था के तहत पुलिस बल तैनात किया गया था, लेकिन विजय ने किसी भी विशेष सरकारी प्रोटोकॉल का लाभ नहीं लिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय का यह कदम जनता के बीच एक मजबूत संदेश देने की कोशिश है। वे खुद को एक आम आदमी और जिम्मेदार नेता के रूप में पेश करना चाहते हैं। दक्षिण भारत की राजनीति में जहां अक्सर नेताओं पर वीआईपी संस्कृति को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे हैं, वहीं विजय का यह रुख उन्हें अलग पहचान दिला सकता है।
तमिलनाडु के राज्यपाल ने हाल ही में राज्य की 16वीं विधानसभा भंग कर दी है। 23 अप्रैल को हुए चुनावों के नतीजे 4 मई को घोषित किए गए थे। इन चुनावों में TVK ने सबसे बड़ी पार्टी बनकर सबको चौंका दिया। वहीं, डीएमके को केवल 59 सीटों पर संतोष करना पड़ा।
फिल्मी दुनिया से राजनीति में आए विजय पहले ही युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय रहे हैं। अब उनकी राजनीतिक शैली भी लोगों का ध्यान खींच रही है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अगर विजय इसी तरह सादगी और पारदर्शिता की राजनीति पर जोर देते रहे, तो आने वाले समय में वे तमिलनाडु की राजनीति में एक मजबूत और प्रभावशाली नेता बन सकते हैं।

