मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को कारोबार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई। वैश्विक बाजारों से मिले मिले-जुले संकेतों और आईटी सेक्टर में तेज बिकवाली के चलते घरेलू शेयर बाजार दबाव में नजर आया। कारोबार शुरू होते ही निवेशकों में बेचैनी देखने को मिली, जिसका असर प्रमुख सूचकांकों पर साफ दिखाई दिया। सेंसेक्स 700 अंक से अधिक टूट गया, जबकि निफ्टी 24,000 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे फिसल गया।
कारोबार के शुरुआती घंटों में बीएसई सेंसेक्स 732.19 अंक यानी 0.95 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,677.79 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 200.10 अंक यानी 0.83 प्रतिशत गिरकर 23,967.90 पर कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार में बिकवाली का दबाव इतना अधिक था कि अधिकांश सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में कारोबार करते नजर आए।
बाजार की कमजोरी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शुरुआती कारोबार में 1,324 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि केवल 956 शेयरों में तेजी देखने को मिली। निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश की ओर दिखाई दिया, जबकि आईटी सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला।
निफ्टी-50 के हीटमैप के अनुसार, आईटी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। सबसे ज्यादा नुकसान इंफोसिस के शेयर को हुआ, जो करीब 7.7 प्रतिशत टूटकर 1,039.90 रुपये के स्तर पर पहुंच गया। इसके अलावा टेक महिंद्रा में 6.5 प्रतिशत, टीसीएस में 6.1 प्रतिशत, एचसीएल टेक में 5.5 प्रतिशत और विप्रो में 3.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। आईटी शेयरों में इस व्यापक बिकवाली ने पूरे बाजार की धारणा को प्रभावित किया और निवेशकों के बीच चिंता बढ़ा दी।
हालांकि, बाजार में मची इस गिरावट के बीच कुछ चुनिंदा शेयर मजबूती के साथ कारोबार करते नजर आए। अडाणी एंटरप्राइजेज लगभग 1 प्रतिशत की बढ़त के साथ दिन का प्रमुख गेनर बना रहा। इसके अलावा एनटीपीसी, सिप्ला, बजाज ऑटो, आईसीआईसीआई बैंक और मैक्स हेल्थकेयर जैसे शेयरों में भी सीमित बढ़त दर्ज की गई। इन कंपनियों के शेयरों ने बाजार को कुछ हद तक सहारा देने का प्रयास किया, लेकिन आईटी सेक्टर की कमजोरी के सामने यह असर काफी सीमित रहा।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस बड़ी गिरावट की मुख्य वजह वैश्विक आईटी कंपनी एक्सेंचर की ओर से जारी किया गया कमजोर कारोबारी अनुमान है। एक्सेंचर ने वित्त वर्ष 2026 के लिए अपने राजस्व वृद्धि अनुमान को घटा दिया है और मांग में सुस्ती की चेतावनी दी है। इसके बाद अमेरिकी बाजार में एक्सेंचर के शेयरों में करीब 18 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई। इसी का असर भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों पर भी देखने को मिला।
कंपनी ने मध्य-पूर्व क्षेत्र में चुनौतियों और ग्राहकों द्वारा तकनीकी सेवाओं पर खर्च कम किए जाने को प्रमुख कारण बताया है। चूंकि भारतीय आईटी कंपनियों का बड़ा कारोबार वैश्विक ग्राहकों पर निर्भर करता है, इसलिए एक्सेंचर की चेतावनी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक संकेतक और आईटी सेक्टर से जुड़े अपडेट बाजार की दिशा तय करेंगे। फिलहाल निवेशकों को सतर्क रहने और दीर्घकालिक निवेश रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।

