9 Jun 2026, Tue

Stock Market Highlights: हफ्ते के पहले ही दिन क्रैश हुआ बाजार, इन शेयरों में भारी गिरावट

सोमवार का दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए भारी गिरावट लेकर आया। एशियाई बाजारों में कमजोरी, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के चलते घरेलू शेयर बाजार लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। निवेशकों की भारी बिकवाली के कारण बाजार में पूरे दिन दबाव बना रहा।

सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट

बीएसई सेंसेक्स 719.08 अंक यानी 0.97 प्रतिशत गिरकर 73,524.26 अंक पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई का निफ्टी 50 इंडेक्स भी 243.70 अंक यानी 1.04 प्रतिशत टूटकर 23,123.00 अंक पर बंद हुआ।

विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की धारणा को कमजोर किया, जिसका सीधा असर बाजार पर देखने को मिला।

वैश्विक कारणों से बढ़ी बिकवाली

शेयर बाजार में गिरावट के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय कारण प्रमुख रहे। एशियाई बाजारों में भारी कमजोरी के साथ-साथ इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए ताजा हमलों ने भू-राजनीतिक तनाव को बढ़ा दिया है। इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने भी बाजार की चिंता को और बढ़ा दिया।

विश्लेषकों का मानना है कि मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ने से वैश्विक सप्लाई चेन पर असर पड़ सकता है, जिससे तेल की कीमतों में और अस्थिरता देखने को मिल सकती है।

बाजार में चौतरफा दबाव

सोमवार के कारोबारी सत्र में सेंसेक्स की 30 में से केवल 7 कंपनियों के शेयर ही बढ़त के साथ बंद हो पाए, जबकि 23 कंपनियों में गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी 50 में भी यही स्थिति रही, जहां 50 में से सिर्फ 9 शेयर ही हरे निशान में बंद हुए, जबकि 41 शेयरों में गिरावट देखी गई।

टॉप गेनर और लूजर

सेंसेक्स की कंपनियों में पावर ग्रिड सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला शेयर रहा, जिसमें 1.79 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इसके विपरीत, एटरनल के शेयर में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली, जो 3.24 प्रतिशत टूटकर बंद हुआ।

निवेशकों की चिंता बढ़ी

लगातार वैश्विक अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के चलते निवेशकों में सतर्कता बढ़ गई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय तनाव कम नहीं होता, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

निष्कर्ष

सोमवार की गिरावट ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भारतीय शेयर बाजार वैश्विक घटनाओं से काफी प्रभावित होता है। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और तेल की कीमतों पर बनी रहेगी, जो बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

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