मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार का दिन आईटी सेक्टर के निवेशकों के लिए बेहद निराशाजनक रहा। वैश्विक आईटी और कंसल्टिंग दिग्गज एक्सेंचर (Accenture) के कमजोर आउटलुक और राजस्व वृद्धि अनुमान में कटौती के बाद भारतीय आईटी शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। बाजार खुलते ही निवेशकों में घबराहट फैल गई और कुछ ही घंटों में आईटी सेक्टर की कंपनियों के मार्केट कैपिटलाइजेशन में करीब ₹2 लाख करोड़ की गिरावट दर्ज की गई।
दरअसल, एक्सेंचर ने अपने वित्त वर्ष 2026 के लिए राजस्व वृद्धि अनुमान को कम कर दिया है। कंपनी का कहना है कि दुनियाभर की कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक में रुचि तो दिखा रही हैं, लेकिन कुल टेक्नोलॉजी बजट बढ़ाने के लिए तैयार नहीं हैं। कंपनियां नए प्रोजेक्ट्स पर खर्च करने की बजाय अपने मौजूदा बजट का पुनर्वितरण कर रही हैं और AI आधारित परियोजनाओं को प्राथमिकता दे रही हैं। इस बयान ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है कि वैश्विक आईटी खर्च में सुस्ती लंबे समय तक जारी रह सकती है।
एक्सेंचर की इस चेतावनी का सबसे ज्यादा असर भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों पर देखने को मिला। देश की दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी इंफोसिस के शेयर करीब 7.5 प्रतिशत तक टूट गए। वहीं टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में लगभग 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। टेक महिंद्रा के शेयर 6 प्रतिशत से अधिक लुढ़क गए, जबकि विप्रो में करीब 5 प्रतिशत और एचसीएल टेक में 3 प्रतिशत से ज्यादा की कमजोरी देखने को मिली।
केवल बड़ी कंपनियां ही नहीं, बल्कि मिडकैप आईटी शेयर भी बिकवाली की चपेट में आ गए। कोफोर्ज, एमफैसिस, पर्सिस्टेंट सिस्टम्स, टाटा एलेक्सी और केपीआईटी टेक्नोलॉजीज जैसे शेयरों में भी तेज गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी 500 इंडेक्स के टॉप लूजर्स की सूची में अधिकांश आईटी कंपनियां शामिल रहीं, जिससे सेक्टर में व्यापक कमजोरी का संकेत मिला।
विशेषज्ञों का मानना है कि एक्सेंचर की रिपोर्ट में सबसे बड़ा झटका आउटसोर्सिंग कारोबार को लेकर मिला है। कंपनी ने बताया कि उसकी आउटसोर्सिंग बुकिंग्स में सालाना आधार पर 15 प्रतिशत की गिरावट आई है। भारतीय आईटी कंपनियों की आय का बड़ा हिस्सा विदेशी ग्राहकों के आउटसोर्सिंग कॉन्ट्रैक्ट्स से आता है। ऐसे में यदि वैश्विक कंपनियां नए प्रोजेक्ट्स और आईटी सेवाओं पर खर्च कम कर रही हैं, तो इसका सीधा असर भारतीय कंपनियों की आय और मुनाफे पर पड़ सकता है।
हालांकि एक्सेंचर ने AI सेक्टर को लेकर सकारात्मक संकेत भी दिए हैं। कंपनी का कहना है कि AI आधारित सेवाओं और समाधानों की मांग लगातार बढ़ रही है और वह इस क्षेत्र में बड़े निवेश की तैयारी कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी इस वर्ष करीब 9 अरब डॉलर तक के अधिग्रहण करने की योजना बना रही है। इसके बावजूद बाजार फिलहाल इस बात को लेकर चिंतित है कि AI से होने वाली कमाई अभी शुरुआती चरण में है और इसका पूरा लाभ मिलने में समय लग सकता है।
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कॉर्पोरेट खर्च में कमजोरी आने वाले महीनों में भी आईटी सेक्टर पर दबाव बनाए रख सकती है। ऐसे में निवेशकों को आईटी शेयरों में निवेश करते समय सतर्क रहने और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी जा रही है।
शुक्रवार की यह गिरावट इस बात का संकेत है कि वैश्विक टेक्नोलॉजी उद्योग में मामूली नकारात्मक संकेत भी भारतीय आईटी सेक्टर पर बड़ा असर डाल सकते हैं। आने वाले तिमाही नतीजों और वैश्विक मांग के आंकड़ों पर अब निवेशकों की नजर बनी रहेगी।

