शेयर बाजार में बड़ी गिरावट: सेंसेक्स 900 अंक टूटा, निफ्टी 24,000 से नीचे, निवेशकों में घबराहट
गुरुवार, 30 अप्रैल 2026 को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत निवेशकों के लिए भारी झटका लेकर आई। वैश्विक बाजारों से कमजोर संकेत और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के चलते बाजार खुलते ही बड़ी गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में ही BSE Sensex और NSE Nifty 50 दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में गहराई तक फिसल गए।
सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट
हफ्ते के चौथे कारोबारी दिन सेंसेक्स करीब 910 अंकों की गिरावट के साथ 76,586 के स्तर पर आ गया, जो लगभग 1.47% की गिरावट दर्शाता है। वहीं निफ्टी में भी 282 अंकों से ज्यादा की कमजोरी देखने को मिली और यह 23,900 के आसपास कारोबार करता नजर आया। खास बात यह रही कि निफ्टी एक बार फिर 24,000 के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे चला गया, जिससे बाजार में बेचैनी बढ़ गई है।
बाजार में चौतरफा बिकवाली
कारोबार की शुरुआत से ही बाजार में बिकवाली का दबाव साफ दिखाई दिया। गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़ने वाले शेयरों से काफी ज्यादा रही। आंकड़ों के मुताबिक करीब 1,300 से अधिक शेयर गिरावट के साथ खुले, जबकि 800 से कम शेयर ही बढ़त में रहे।
सबसे ज्यादा दबाव बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर में देखा गया। बड़े-बड़े दिग्गज शेयरों में बिकवाली के चलते बाजार को संभलने का मौका ही नहीं मिला। निवेशकों ने जोखिम से बचने के लिए तेजी से मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिससे गिरावट और तेज हो गई।
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल को माना जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं।
भारत जैसे देश के लिए, जो अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, यह स्थिति चिंता का विषय है। महंगा कच्चा तेल देश के व्यापार घाटे और महंगाई दोनों को बढ़ा सकता है। इसी आशंका ने निवेशकों के मन में डर पैदा किया और उन्होंने बड़े पैमाने पर शेयर बेचने शुरू कर दिए।
वैश्विक संकेत भी रहे कमजोर
अंतरराष्ट्रीय बाजारों से भी सकारात्मक संकेत नहीं मिले। एशियाई और अमेरिकी बाजारों में अस्थिरता के चलते भारतीय बाजार पर भी दबाव बना। निवेशक फिलहाल सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे इक्विटी बाजार में गिरावट का माहौल बन गया है।
निवेशकों के लिए क्या है सलाह?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल स्थिति अनिश्चित बनी हुई है। जब तक मध्य-पूर्व में तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
छोटे और रिटेल निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे घबराकर कोई बड़ा फैसला न लें। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह समय धैर्य बनाए रखने का है, जबकि शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स को सतर्क रहने की जरूरत है।
निष्कर्ष
आज की गिरावट ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वैश्विक घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतें भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं। आने वाले दिनों में बाजार का रुख काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय हालात और निवेशकों के भरोसे पर निर्भर करेगा।

