RBI MPC Meeting: रेपो रेट 5.25% पर बरकरार, महंगाई और वैश्विक जोखिमों के बीच सतर्क रुख
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अहम मानी जाने वाली मौद्रिक नीति बैठक में Reserve Bank of India (RBI) ने एक बार फिर सतर्क रुख अपनाया है। RBI गवर्नर Sanjay Malhotra ने घोषणा की कि मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखने का फैसला किया है।
लगातार दूसरी बार दरों में कोई बदलाव नहीं
6 अप्रैल से शुरू हुई तीन दिवसीय बैठक के बाद यह फैसला लिया गया। इसके साथ ही अन्य प्रमुख दरों को भी यथावत रखा गया है।
- स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF): 5%
- मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF): 5.5%
- बैंक रेट: 5.5%
गवर्नर ने कहा कि RBI ने अपना रुख “न्यूट्रल” रखा है, जिससे भविष्य में जरूरत के अनुसार दरों में बदलाव की गुंजाइश बनी रहे।
मजबूत दिख रही है भारतीय अर्थव्यवस्था
बैठक के दौरान RBI ने भारत की आर्थिक स्थिति को लेकर सकारात्मक संकेत दिए। गवर्नर के अनुसार, देश की वास्तविक GDP ग्रोथ 7.6% रहने का अनुमान है।
यह वृद्धि मुख्य रूप से मजबूत उपभोग, बढ़ते निवेश और सरकारी सुधारों के कारण संभव हो रही है। सर्विस सेक्टर की तेजी और GST से जुड़े सुधारों ने भी आर्थिक गतिविधियों को मजबूती दी है।
वैश्विक चुनौतियां बनी चिंता
हालांकि, RBI ने वैश्विक स्तर पर बढ़ते जोखिमों को लेकर चिंता जताई है। खासकर Strait of Hormuz में जारी तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ रहा है।
तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से महंगाई बढ़ने का खतरा बना हुआ है। इसके अलावा सप्लाई चेन में रुकावटें भी आर्थिक विकास को प्रभावित कर सकती हैं।
‘रुको और देखो’ की नीति जारी
RBI का यह फैसला साफ तौर पर “वेट एंड वॉच” यानी ‘रुको और देखो’ की रणनीति को दर्शाता है। केंद्रीय बैंक फिलहाल जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाना चाहता और वैश्विक हालात पर नजर बनाए हुए है।
आम लोगों पर क्या असर?
रेपो रेट स्थिर रहने का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा।
- होम लोन और कार लोन की EMI फिलहाल नहीं घटेगी
- बैंकों द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद टल गई है
- निवेशकों के लिए बाजार में स्थिरता बनी रह सकती है
हालांकि, स्थिर ब्याज दरें अर्थव्यवस्था में संतुलन बनाए रखने में मदद करती हैं।
2025 में मिली थी राहत
गौरतलब है कि साल 2025 में RBI ने कुल 125 बेसिस पॉइंट की कटौती कर आम लोगों को बड़ी राहत दी थी। लेकिन 2026 में बदलते वैश्विक हालात, खासकर भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई के दबाव के चलते केंद्रीय बैंक अब सतर्क नजर आ रहा है।
आगे क्या उम्मीद?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर महंगाई काबू में रहती है और वैश्विक हालात स्थिर होते हैं, तो आने वाले महीनों में ब्याज दरों में कटौती की संभावना बन सकती है।
लेकिन फिलहाल RBI का फोकस आर्थिक स्थिरता बनाए रखने और महंगाई को नियंत्रण में रखने पर है।
निष्कर्ष
RBI का यह फैसला संतुलित और सोच-समझकर लिया गया कदम माना जा रहा है। जहां एक ओर भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है, वहीं वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए सतर्कता बरतना जरूरी है। ऐसे में रेपो रेट को स्थिर रखना एक रणनीतिक निर्णय है, जो आने वाले समय में अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने में मदद कर सकता है।

