हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव का माहौल देखने को मिला। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखने के बावजूद बाजार में निवेशकों का उत्साह कमजोर नजर आया। दिन के अंत में दोनों प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में बंद हुए।
सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट
शुक्रवार के कारोबारी सत्र के अंत में बीएसई सेंसेक्स 116.67 अंक (0.16%) की गिरावट के साथ 74,243.34 पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 49.85 अंक (0.21%) टूटकर 23,366.70 के स्तर पर आ गया।
पूरे दिन बाजार में अस्थिरता बनी रही। शुरुआत में बाजार में तेजी देखने को मिली और सेंसेक्स 300 अंक से अधिक चढ़ गया था, जबकि निफ्टी 23,500 के ऊपर पहुंच गया था। हालांकि, बाद में बिकवाली का दबाव बढ़ने से बाजार ने अपनी शुरुआती बढ़त गंवा दी।
किन सेक्टर्स पर रहा दबाव?
कारोबारी सत्र में आईटी और मेटल सेक्टर के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ गया।
निफ्टी के प्रमुख लूजर्स में शामिल रहे:
- हिंदाल्को इंडस्ट्रीज
- विप्रो
- ट्रेंट
- कोल इंडिया
- टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS)
इन शेयरों में गिरावट ने पूरे बाजार की धारणा को कमजोर किया।
वहीं दूसरी ओर, कुछ बड़े शेयरों ने बाजार को संभालने की कोशिश की, जिनमें शामिल हैं:
- अडानी एंटरप्राइजेज
- अडानी पोर्ट्स
- हिंदुस्तान यूनिलीवर
- बजाज फाइनेंस
- एक्सिस बैंक
इन शेयरों में खरीदारी ने बाजार की गिरावट को कुछ हद तक सीमित किया।
बाजार में गिरावट की मुख्य वजहें
1. निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली
शुरुआती कारोबार में बाजार में मजबूती देखी गई थी। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में अच्छी बढ़त दर्ज की गई थी। लेकिन जैसे ही शेयरों के दाम ऊंचे हुए, निवेशकों ने मुनाफा वसूली शुरू कर दी। इस वजह से बाजार की बढ़त धीरे-धीरे खत्म हो गई और अंत में गिरावट दर्ज की गई।
2. RBI का महंगाई अनुमान बढ़ना
भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई अनुमान को 4.6% से बढ़ाकर 5.1% कर दिया है। इसके पीछे वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी को मुख्य कारण बताया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। मई से अब तक पेट्रोल लगभग 7.4% और डीजल लगभग 8.4% महंगा हो चुका है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ी और बाजार पर दबाव पड़ा।
निवेशकों की धारणा पर असर
महंगाई बढ़ने की आशंका और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक महंगाई पर नियंत्रण और वैश्विक संकेतों में सुधार नहीं होता, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।
निष्कर्ष
शुक्रवार का कारोबारी सत्र भारतीय शेयर बाजार के लिए मिला-जुला रहा। शुरुआती तेजी के बाद मुनाफावसूली और महंगाई को लेकर चिंता ने बाजार को नीचे खींच लिया। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में बंद हुए, जिससे यह साफ संकेत मिला कि निवेशक अभी सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।

