देश की जानी-मानी ज्वेलरी कंपनी Rajesh Exports Limited और इसके चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर राजेश मेहता इन दिनों बाजार नियामक संस्था सेबी की कार्रवाई को लेकर सुर्खियों में हैं। मार्केट रेगुलेटर Securities and Exchange Board of India (SEBI) ने कंपनी और इसके शीर्ष प्रबंधन के खिलाफ अंतरिम आदेश जारी किया है, जिसके बाद शेयर बाजार में कंपनी के स्टॉक पर भी भारी असर देखने को मिला है।
SEBI की शुरुआती जांच में कंपनी पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, राजेश एक्सपोर्ट्स पर वित्तीय आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने, फंड के कथित दुरुपयोग और कॉर्पोरेट गवर्नेंस में गड़बड़ियों जैसे गंभीर मुद्दे सामने आए हैं। इन आरोपों के बाद कंपनी का शेयर बाजार में प्रदर्शन कमजोर हो गया और यह 5 प्रतिशत के लोअर सर्किट पर पहुंच गया।
SEBI के अनुसार, यह मामला वित्त वर्ष 2021 से 2025 के बीच के वित्तीय रिकॉर्ड से जुड़ा हुआ है। जांच में दावा किया गया है कि कंपनी ने अपने कंसोलिडेटेड रेवेन्यू को लेकर असामान्य रूप से बड़े आंकड़े पेश किए, जो वास्तविक कारोबार से मेल नहीं खाते। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कथित तौर पर करीब ₹15.15 लाख करोड़ के राजस्व को लेकर गलत रिपोर्टिंग की गई, जिसमें भारी अंतर पाया गया है। यह भी आरोप है कि रिपोर्टेड आंकड़ों का बड़ा हिस्सा वास्तविक कारोबार से मेल नहीं खाता।
SEBI ने अपनी जांच में यह भी संकेत दिया है कि कंपनी से जुड़े प्रमोटर समूह और संबंधित संस्थाओं के माध्यम से फंड के इस्तेमाल को लेकर भी कई सवाल उठे हैं। इसी कारण नियामक ने मामले की आगे विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं और कंपनी के कॉर्पोरेट गवर्नेंस ढांचे पर भी निगरानी बढ़ा दी है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच कंपनी के प्रमुख राजेश मेहता एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। राजेश मेहता का जन्म 20 जून 1964 को बेंगलुरु में हुआ था। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा सेंट जोसेफ स्कूल से प्राप्त की और कम उम्र में ही अपने पारिवारिक ज्वेलरी व्यवसाय से जुड़ गए। 1980 के दशक में उन्होंने अपने भाई प्रशांत मेहता के साथ मिलकर चांदी के आभूषणों के कारोबार की शुरुआत की थी।
बताया जाता है कि शुरुआती दौर में उन्होंने सीमित संसाधनों के साथ व्यापार शुरू किया और धीरे-धीरे अपने कारोबार का विस्तार दक्षिण भारत, गुजरात और मुंबई जैसे बड़े बाजारों तक किया। 1995 में कंपनी ने शेयर बाजार में कदम रखा और आईपीओ के जरिए लगभग 10 करोड़ रुपये जुटाए। इसके बाद कंपनी ने गोल्ड रिफाइनिंग, मैन्युफैक्चरिंग और रिटेल सेक्टर में तेजी से विस्तार किया।
कंपनी की वैश्विक पहचान तब और मजबूत हुई जब 2015 में इसने स्विट्जरलैंड की प्रसिद्ध गोल्ड रिफाइनरी वाल्कैम्बी (Valcambi) का अधिग्रहण किया। यह डील लगभग 400 मिलियन डॉलर में पूरी की गई थी और इसे पूरी तरह नकद लेनदेन माना गया था।
फिलहाल SEBI की अंतरिम कार्रवाई के बाद निवेशकों की नजरें इस मामले की आगे की जांच और कंपनी के भविष्य पर टिकी हुई हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस केस के और भी महत्वपूर्ण खुलासे सामने आ सकते हैं, जिनका असर कंपनी के शेयर और निवेशक भरोसे पर देखने को मिल सकता है।

